पंगेबाज

Saturday, April 26, 2008

ये पोस्ट दारू प्रेमियो के नाम

ये तो जग जाहिर बात है कि हम संजाल पर  विश्व और हिंदी ब्लोग दुनिया के पहले और इकलौते पंगेबाज है ,तो ये बात कोई अच्छी नही की हम किसी का ज्यादा दिन एहसान ले ,इसलिये हमने अपना पक्का ठिकाना कर लिया है यहा . आज के बाद हम किसी से भी पंगा लेगे तो यही से लेगे.इसमे किसी को कोई शक सुबह नही होना चाहिये  ,अगर किसी को हो तो बताये ? हम भी ताक मे है कि यहा से से पहला पंगा किस से ले ?

वैसे आप भी बुरे नही है इस शुभ कार्य के लिये, हम औजारो पे कतई धार धरे बैठे है ,आप बस एक कदम आगे बढाये जी. कल सुबह पहला नंबर आप ही का है  .

आज का दिन उन लोगो के नाम जो खुद लगा नही सकते ( हिम्मत चाहिये जी, वो इनमे होती नही  अपनी अपनी चोखेर बालियो के डर से ? )और दुसरे को दो घूट लगाये देखना हजम नही होता ,अरे आप आज तक कितने अंगूरो को डकार चुके है,  ? हमने कुछ कहा कभी आपको, ?  अगले ने अगर जरा सा अगूंर का रस पी लिया वो भी अपने खर्चे पर (आपने पिलाया हो तो भी एक बार हम सुन कर अनसुनी कर सकते है) तो आप क्यो जलते है जी   ? 

हमने अकसर देखा है राह मे जरा सा किसी से गाडी भिड जाये ,अगला कुछ सोच रहा हो आपको रास्ता जरा देर बाद दे पाये ,बस आप शुरू

"दारू पीकर चला रहा होगा,"

नही जी हम सख्त खिलाफ़ है आप सब की इस बात के,हमारा मानना है कि आदमी दो घूट लगाये बिना ज्यादा बेढंगे ढंग से गाडी चलाता है,लीजीये हम आपको नीचे १० चित्र दिखा रहे है और चैलेंज करते है कि अगर ये लोग चित्र खीचते वक्त दारू पिये हुये थे,तो आप होश मे रहकर इनमे से एक भी काम कर दिखाईये..

साहब कह देना बहुत आसान है ,जो काम आप बिना पिये हुये नही कर सकते .अगर इन्होने पीकर भी कर दिखाया है तो मजाक नही है. हिम्मत चाहिये जी और दिल गुरदा जिगर फ़ेफ़डा भी. खाली कह देने से काम नही चलता ,

"दारू पीकर गाडी चला रहा था" ये केवल शराब के शौकीनो से जलने वाले कहते है

. अगर इसने दारू पी रखी थी तो आप बिना पिये गाडी यहा खडी कर दिखाये

अगले का कमाल देखिये ,उस पर तोहमत ना लगाये

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२.अरे आपसे तो आठ इंच के स्पीड ब्रेकर पर गाडी नही चढती,अगले ने देखिये कहा खडी की है ? और कितने ढंग से

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३.जरा कोशिश कीजीये ,आप भी यहा पार्क कर देखिये जी, अरे आप तो खुद सीढी से ढंग से नही उतर पाते   ?

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४. है ना कमाल की पार्किंग ,है इक की जगह मे दो गाडिया ?  आप मे  है दम ऐसा करने का..?

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५. ८०० है तो क्या हुआ ? पंगा लेके देख ?

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६ शौर्ट कट हर कोई नही मार पाता ,गुर्दा चाहिये जी ,है आपमे ?

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७ देखिये कहा पार्क की है गाडी ठीक सीढी के पास,भाई उतरने का जुगाड भी चाहिये ना ?

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८. कोई खड्डे मे ना गिर जाये , कितना पुण्य भरा कार्य है ,आप कर सकते है ?

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९. देखा  ? क्या एंट्री है ?

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१०. ये धुल गई मेरी गाडी .? आप ने की कभी ऐसे सफ़ाई ?

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१०.कोशिश करे क्या आप भी अपनी गाडी को ऐसे खडी कर सकते है ?

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१० देखा ? है ना कमाल ,है हिम्मत ?

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१० मै बिना जैक के गाडी का पहिया बदल लेता हू ,आप ?

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Wednesday, April 23, 2008

आफ़िस के सहयोगी

अब ऐसा भी नही है कि इस कार्य मे हमी हम हो ,नही जी हमारे सहयोगी भी कम नही थे ,हमेशा तैयार रहते थे की कोई मौका तो दे पंगा हाजिर ,मै विडिओ विभाग देखता था,मोर्या जी आडियो ,दोनो ही साथ साथ अनुसंधान से भी जुडे थे,यानी खर भिश्ती पीर बावर्ची सभी  का काम हमे ही करना होता था अपने अपने विभाग का,दोनो का केबिन साथ साथ था.दोनो ही मस्त मौला थे,दोनॊ ही अपने काम मे किसी की राय के सख्त खिलाफ़,दोनॊ हॊ किसी की जी हजूरी से बेतहाशा चिढने वाले,पक्के दोस्त थे हम दोनो, कुछ मामलो मे मेरे गुरु भी,आखिर वो अपट्रान के रेडियो डिवीजन के पुराने चावल जो थे.
  कपूर जी जो सेल्स विभाग मे एकजीक्यूटिव थे, उन्हे अपने बास को पालिंश करना और उपर चढाये रखने मे महारत हासिल थी . वे भी हम लोगो को तुच्छ समझते थे अपने बास की तरह,लेकिन पता नही क्यो छुप छिपाकर  हमसे दोस्ती भी दर्शाते रहते रहते थे,उन्हे  भी अपने को दूसरो से अलग और उंचा दिखाने का इस कदर शौक था ,जब भी वो किसी टूर से वापस आते (सेल्स वालो को अकसर आफ़िस मे बैठने नही दिया जाता ,उन्हे महिने मे ३५  दिन बाहर भेजने की पूरी कोशिशे होती है) समय निकाल कर हमारे पास जरूर आते और आते ही थोडी देर खडे होते दाये मुडते बाये मुडते ,पैर को इधर उधर नचाते रहते,कभी उंग्लियो के बल खडे होते और कभी एडी के बल, हम दोनो (मै और मोर्या जी एक दूसरे को देख कर मुसकुराते रहते पर उनकी तरफ़ ना देखते,अच्छा अरोरा जी मै चलता हू कह कर कपूर साहब थोडा सा लगंडाहट लिये हुये आगे तक जाते (जब वो आये थे बिलकुल ठीक चल रहे थे) फ़िर लौट आते बडी आशा भरी नजरो के साथ, मै एक काम था आपसे वो भूल ही गया था.

अब तक मोर्या जी मुझे बनावटी गुस्से से आखे तरेर कर फ़ुसफ़ुसाने लगते अरे तुम्हे शर्म नही आती तुम्हारा दोस्त नये जूते दिखाने को घंटे भर से परेशान है और तुम उसे सता रहे हो अब क्या अगला नये जूते दिखाने के चक्कर मे पैर कट्वा ले  ?

और अक्सर मोर्या जी ही पूछ बैठते कपूर साहब पैर मे क्या हो गया है,क्या टूर मे कही चोट खा बैठे,
"नही आगरा गया था वहा से चार पांच जोडी नये जूते ले लिये थे,आज पहने  है तो जरा काट रहे थे,"कपूर साहब प्रफ़ुल्लित मनोदगार वयक्त कर रहे थे
अरे जूते तो बहुत शानदार है ,कपूर साहब आपकी पसंद का जवाब नही,मुझे भी लग रहा था कि जूते बिलकुल नये है,यहा तो आसपास इतनी अच्छी चीज मिलती नही ..(जैसे हम यहा उनके जूते देखने ही बैठे हो)
अब कपूर साहब हमे ये बताते हुये कि उन्हे ए क्लास वस्तूये ही भाती है धीरे धीरे निकल लेते. लैब मे दिन भर हमारे हसने का जरिया रहते बेचारे कपूर साहब  ?
कुछ दिनो बाद कपूर साहब को लुधियाना जाना पडा.वहा उन्हे चिरागदीन की चिप्पी लगी शर्टे मिल गई (उन दिनो लगभग सारे बडे लोग यहा तक के हमारे मालिकान भी चिरागदीन की काटन की शर्टे पहनते थे)बस जी कपूर साहब ने हमारा जीना हराम कर दिया अब चाहे जाये वो शिकारपुर ही जाये ,पर आते ही चिराग दीन की (चिप्पी लगी) नई शर्ट पहनी और हमे दिखाने और बताने आ जाते कि वो कितने सोफ़िस्केटिड प्राणी है, मै अगर चिरागदीन के अलावा कुछ और पहनले तो बदन पर दाने निकल आते है,ये हमे उन्होने ही बताया ,
तब ब्राण्डेड का इतना ज्यादा चलन नही था,रेडीमेट का चलन पैर पसारने लगा था लेकिन विमल ,मफ़तलाल, एस कुमार,डी सी एम का भी अपना नाम काफ़ी होता था,

ये वो जमाना था जब लोग तली हुई चिप्स पापड और घी से किनारा करके खाने की मेज पर विदेशी बटर आयल की २०० ग्राम की बोतल रख अपना स्टेटस दिखाया करते थे.

खैर जी हम दोनो इस उनके बढे स्टेटस से बहुत दुखी थे कि उन्हे कैसे सुधारा जाये,आखिर मोर्या जी ने एक दिन शाम को मुझे साथ लिया ,दोनो एक दर्जी के पास पहुचे उससे पूछा कि घूट्टने  (घूट्टना यानी घूट्नो तक आने वाला पट्टे का कच्छा) मे कितना कपडा लगता है, और बनियान मे कितना  ?  कपडे वाले की दुकान पर पहुचे और विमल का एक लाईनिंग वाला शर्ट का  कपडा लेकर दर्जी को दिया,वो भी इस आदेश के साथ कि विमल लिखी हुई आधे आधे इंच की पट्टी निक्कर और बनियान की साईड के दोनो तरफ़ सिलाई से बाहर झाकती रहे ,दो जोडी सिल दो.

,मैने मोर्या जी से पूछा कि आप सूती के बजाय ये टेरीकाट /पोलियेस्टर के कच्छे किसलिये सिलवा रहो हो गर्मी का समय है,दुखी हो जाओगे.

तुम देखते रहो इस बार तुम्हारे दोस्त का ऐसा इलाज करने वाला हू कि अगले तीन चार महीने तो हमारी तरफ़ आना ही भूल जायेगा.

और यही किया मोर्या जी ने,जैसे ही दो चार दिन बाद कपूर जी पधारे मोर्या जी अचानक बडे मिलनसार दिखाई देने लगे ,उन्होने जम कर कपूर साहब की और उनके कपडो जूतो यहा तक की बनियान और मौजे  की भी तारीफ़ कर डाली ,वे भी बताने लगे कि हर आदमी को हर चीज सूट नही करती,अब इसके लिये चाहे महंगी चीजे ही खरीदनी पडे,लेकिन मजबूरी होती है ,कुछ लोगो की स्किन इतनी सोफ़्ट होती है कि वोह हर कही से ली हुई वस्तूये नही धारण कर सकते जैसे हमारे अरोरा जी कुछ भी पहन लेते है,कही से भी खरीद लेते है,

कपूर साहब भी इन बातो मे हा मे हा मिलाते हुये अपनी नयी टाई जेब से निकाल कर दिखाने लगे जो वोह महेंद्र नगर (नेपाल ) से लाये थे.दोनो लोग एक दूसरे से इतने सहमत दिखाई दिये कि हमे खुंदक आने लगी

लेकिन तभी मोर्या जी ने तुरुप का इक्का चल दिया उन्होने घोषणा की, कि वो चाहे कुछ भी खाले कुछ भी पहन ले ,लेकिन उन्हे कच्छा और बनियान विमल का ही सूट करता है ,

"अच्छा विमल के अंडर गारमेंट्स भी आते है ! आपको गलत फ़हमी है, कोई दुकानदार नकली बेच कर आपको बेवकूफ़ बन रहा है,मैने आज तक कही नही देखे,आप मुझे बताये कहा  से मिलते है ,विमल के अंदर गारमेंट्स आते हो और मुझे या कुमार साहब को ना पता हो ये हो ही नही सकता," कपूर जी ने फ़रमाया

भईया ये बहुत महंगे शौक है हर कोई इनको अफ़ोर्ड नही कर सकता, मेरे तो जूते तक कशमीरी भेड की खाल के आते है मेरी मजबूरी है मेरे शरीर को घटिया चीजे सूट ही नही करती , मुझे तो निक्कर बनियान भी लखनऊ के एक खास दर्जी से सिलवाने पडते है .यकीन नही आता .तो देख लो और मोर्याजी ने बाकायदा शर्ट उतार कर, पेंट उतार कर घुटनो तक के निक्कर और बनियान के किनारी पर विमल की साईड स्ट्रिप दिखा कर ही सांस लिया, और इनमे सारी सिलाई हाथ से होती है ,एक निक्कर को तैयार होने मे दो तीन दिन लग जाते है,

अब कपूर साहब को समझ मे आ रही थी कि मोर्या जी आज अचानक इतने भले क्यो बने हुये थे.

मोर्या जी ने उन्हे अचानक उन्ही की भाषा मे  अन्सोफ़िस्केटिड,और सामान्य वस्तुये रखने वाला बंदा बना दिया था,जिसे वो समझ भी रहे थे कि उन्हे थप्पड मारा गया है वो भी बहुत ढंग से योजना बद्ध तरीके से,लेकिन अभी तक मिलाई गई हा मे हा के कारण वो कुछ कह भी नही सकते थे ,लिहाजा थोडॊ देर इधर उधर की हाक कर मोर्या जी की तारीफ़ मेकसीदे पढते हुये जो गये वाकई मे महिनो नही आये हमे ही उन्हे ढूढना पडता था,

Monday, April 21, 2008

आफ़िस के झरोखे से

पंगेबाजी का हमे यू ही २० साल का तजुर्बा नही है हम जब कुछ नही आता था तब भी हम पंगे ले ही लिया करते थे. आईये आपको एक पुराने पंगे से मिलवाता हू

नौकरी के शुरूआती दिनो मे हम आर एंड डी का काम भी देखते थे,तब भारत मे डिश टी वी के शुरूआती दिन थे वो,और तब मै तकनीकी प्रबंधक को रिपोर्ट करता था. हमारे साथ मे ही प्रबंधक सेल्स का केबिन था,लेकिन वो हमे बडी तुच्छ नजरो से देखते थे,कभी भी कही भी  हमे छोटा साबित करने का कोई मौका हाथ से नही जाने देते थे,

हम अपनी कंपनी के डिश को लांच करने के लिये कार्यरत थे,तब हमारे केबिन मे और तकनीकी निदेशक के केबिन मे दिन भर केबल चलता रहता था,ताकी हम उसकी गुणवत्ता जांच सके,ऐसे मे हमारे  प्रबंधक (सेल्स) को लगा कि उनके केबिन मे भी केबल कनेक्शन होना चाहिये ,लिहाजा उन्होने मुझे फ़ोन किया और कहा,अरोरा मुझे आज ही अपने केबिन मे केबल कनेक्शन चाहिये ,सिर्फ़ मेरे कहने से काम चल जायेगा या मै प्रबंध निदेशक से कहलावाऊ, उनके कहने का ढंग बडा चिढने वाला था

नही सर मै अभी काम शुरू करता हू,आपभी कैसी बात करते है,मै कही आपके कहे से बाहर हू क्या..?

मैने भी तुरंत स्टाफ़ को बुलाकर तागीद की की अभी से उनके केबिन मे मेरे केबिन से केबिल डालने का कार्य शुरू किया जाये लेकिन खबरदार अगर उस पर सिग्नल पहुचा तो..

और लगातार काम करते हुये दो हफ़्ते गुजार दिये ,तंग आकर एक दिन उन्होने तकनीकी निदेशक बाहर गये थे ,तब सर्विसिंग विभाग से आदमी बुलाकर अपने केबिन मे भी केबल लगवा लिया

ऐसे मे शाम को जब मै आफ़िस से घर जाने को निकला,सेल्स वाले बरामदा घेर कर खडे थे ,मुझे देखते ही प्रबधक महोदय ने कमर हिलाते हुये एक अग्रेजी गाना गाना शुरू किया और मुझे बताया कि उनके केबिन मे केबल पर आ रहा था,मैने तुरंत उसे सुनने का अभिनय किया और कहा " सर ये भाषा हमारी समझ मे नही आ रही है,दर असल ये बडे लोगी की भाषा है या तो ये बडे लोगो को समझ मे आती है या उनके कुत्तो को ,और हम दोनो मे से कोई नही है इसलिये जी आप जारी रखे,ये हमारी समझ मे आने वाली नही है हम चले अपने घर, और हम घर चले गये

अगले दिन सुबह सुबह हमे प्रबंध निदेशक के स्टेनो का फ़ोन आया साहब ने बुलाया है आपकी पेशी है

हमने पूछा "खैरियत तो है"

कल आपने प्रबंधक सेल्स को उनके स्टाफ़ के सामने कुत्ता कैसे कह दिया ,और पूछते हो खैरियत तो है वो भी मजे ले रहा था .

बास ने केबिन मे घुसते ही बाई फ़ोकल से घूर कर देखा

तो आपने फ़िर पंगा ले ही लिया,ये आपने ना सुधरने की कोई खसम खाई हुई है क्या..?

नही सर ,लेकिन बात क्या हुई ,अब तो मेरा किसी से कोई झगडा नही हुआ  ?

आप जिम्मेदार अधिकारी होकर  ये सब क्या हरकते करते फ़िरते हो.?

क्या हुआ सर..?

आपको नही पता

जी नही

कल शाम को आपने प्रबंधक सेल्स से क्या कहा

जी मेरी उनसे बात जरूर हुई थी लेकिन मैने उनसे ऐसा कुछ नही कहा

लेकिन उनका कहना है कि आपने उनके स्टाफ़ मे सामने उन्हे कुत्ता कहा है

जी ये बात सिरे से गलत है,आपको तो पता है कि अग्रेजी मेरी अग्रेजी  कमजोर है,मैने सिर्फ़ इतना सा कहा था कि अग्रेजी का जो गाना वो गा रहे है वो मेरी समझ मे नही आ रहा ,और ये भाषा सिर्फ़ बडे लोगो की और उनके पालतू जानवरो की समझ मे ही आती है,जैसे सर आप अग्रेजी समझते है और आपने जो कुत्ते फ़ार्म हाऊस मे पाले हुये है वो भी अग्रेजी समझते है,उस दिन जब मै आपके पास फ़ार्म हाऊस मे गया था,तब जिम्मी और जूली शोर मचा रहे थे, मैने उन्हे चुप करने की बहुत कोशिश की कई बार बोला जिम्मी चुप,जूली चुप, शान्ती से बैठो. लेकिन उन्होने नही सुनी,तभी आपने कहा "जिम्मी ,जूली कम एन सिट ". वो चुपचाप आकर बैठ गये,और मै उन्हे दसियो बार आजा बैठ जा कहता रहा उन्होने एक बार नही सुनी,इसी से मै समझा की उन्हे भी अग्रेजी आती है

अगर कुमार साहब को मेरी इस बात से कोई कष्ट पहुचा हो तो मै उनसे क्षमा मांग लेता हू,मै उनका बहुत आदर करता हू,ऐसी कोई बात तो मै सोच भी नही सकता,

साहब अपनी हसी को रोकते हुये बोले अरोरा तुम सुधर जाओ ,जाओ जाकर अपना काम देखो

लेकिन साहब बात फ़ैल चुकी थी क्योकी कुमार साहब ने दसियो लोगो को खास तौर पर ये बात बताई थी कि उन्हे मैने कुत्ता कहा है और आज मेरा हिसाब हो जायेगा

लेकिन बाद मे पता चला की प्रबंधक महोदय ने उन्हे पहले ही कहा हुआ था कि मेरे से पंगा लेने की कोशिशे छोड दे 

Thursday, April 17, 2008

करकट दमनक और जंगल की महारानी

 

जंगल मे महाराज के आकस्मिक निधन हो जाने पर करकट दमनक ने महारानी तो तख्त का वारिस घोषित कर अपनी तिकडी को फ़िट करने की बहुत कोशिश की ,पर महारानी ने एक बैल को चुना जो जुगाली करने के अलावा सिर्फ़ सिर हिलाता रहता था,लेकिन फ़िर भी महारानी को करकट दमनक और पिंगलक की सहायता तो लेनी ही पडी.

काफ़ी वक्त गुजर गया, महारानी भी जंगल की राजनीती मे अपनी समझ दिखाने लगी थी ,महारानी ने जैसे ही जंगल मे चुनाव कराने की इच्छा जाहिर की,दमनक ने तडाक से जंगल के कर्मचारियो के वेतन बढाने की घोषणा महारानी से करवा दी.

करकट दमनक और पिंगलक पुराने खिलाडी थे,उन्होने तुरंत भाप लिया महारानी अब सीधे सीधे  खुद या फ़िर राजकुमार के नाम पर शासन संभालना चाहती है

पिंगल नाम का सुअर जो हमेशा उस जगह अपनी थूथन गडाये फ़िरता था जहा माल मिलने की कोई संभावना हो,महाराज के खजाने की देख रेख के नाम पर हरएक से कुछ ना कुछ निकलवाने मे उस्ताद था ,उसी ने ने महाराज के  चुनाव आदेश के नाम पर मोटा माल वसूल कर आधा अपने घर भेजा आधा महाराज के पास जमा करा दिया था

जंगल मे व्यापारियो ने पिंगल को दिये पैसे तुरंत पूरे करने के लिये माल की कमी दिखा कर रेट दुगने चौगुने वसूल करने शुरू कर दिये.

जनता त्राही त्राही करने लगी ,बात महारानी तक पहुची,महारानी ने मिटिंग बुलाई ,दमनक ने महारानी को पक्का यकीन दिला दिया की महंगाई कही नही बढी है केवल जंगल मे ये कुछ विरोधी पार्टी के  लाला लोग माल दबाकर मोटा माल कमाने की फ़िराक मे है अगर आपकी आज्ञा हो तो सेनापती को बुला कर माल जब्त करा देते है,जनता को भी लगेगा कि हमने कुछ किया और विरोधी पार्टी के कुछ बंदे भी अपने कब्जे मे आ जायेगे

बाकी सारी जनता आपके ही गुण गा रही है,पर राजकुमार के लिये वक्त ठीक नही चल रहा राजपुरोहित का कहना है कि उन्हे एक सौ एक दलितो के घर जाकर मांग कर खाना चाहिये इस टोटके के बाद राजकुमार के राजयोग मे कोई परेशानी नही आयेगी,एक पंथ दो काज हो जायेगे , राजकुमार को जनता के बीच भेज कर दिखवा लीजीये,महारानी को बात जमी,और राजकुमार जनता के बीच हाथो हाथ लिये गये ,राजकुमार किसी भी दलित के घर जाकर अपने आदमियो से खाना बनवाकर जनता के साथ बैठ्कर खाते और अपना बिस्तर किसी के भी घर मे बिछवा कर रातगुजार लेते ,जनता उन्हे देखने मे लगी थी और दमनक करकट के भेजे चेले उनकी इतनी जय जयकार करते कि उन्हे लगता वो वाकई राजकुमार है और जंगल के मालिक,

लेकिन महगांई तो वाकई मे बढ चुकी थी खाने पकाने का ईधन से लेकर खाने का सामान सभी बाजार मे बहुत महंगा मिल रहा था,ऐसे मे करकट दमनक और पिंगल ने मिलकर अखबार वालो को बुला कर बताया कि जनता के पास आज बहुत पैसे है जिनकी वजह से वोह ढेरो वस्तुये खरीद रहे है महारानी के शासन मे  उनका जीवन स्तर बढ गया है आप देखिये आज बाजार मे कोई इलेक्ट्रोनिक सामान खरीदिये हमने चीन से सस्ते सामान आयात करा दिये है,बाजार मे प्रतिस्पर्धा बढी है,लोगो को चाईनीज थाई इतेलियन खाना खाने की आदते पड गई है जिसके वजह  से जंगल मे उपलब्ध देसी खाना हमने विदेशो मे बेचने वाले किसानो को सबसिडी देकर मोटी कमाई करवाई है देखिये शराब की बिक्री के आकडे बताते है कि जनता के पास बहुत पैसा है हमने जो माल खुलवाये है,दुनिया भर की बडी बडी कम्पनी के जंगल मे खुले आऊट लेट बताते है कि महंगाई कही नही है घंटॊ लाईन मे लग कर फ़िर कही अंन्दर जाने का नंबर आता है,अभी हम आपलोगो की ही मांग पर  जुए के अड्डो को कानूनी रूप देने मे लगे है,और आप कहते है महंगाई बढ रही है  ?

आपलोग सिर्फ़ अपना अखबार चलाने के लिये रोज गलत खबरे दे रहे है,अगर आप इस वक्त हमारा सहयोग नही करेगे तो यकीन रखियेगा हम भी पहले की तरह आपलोगो को पदमश्री वगैरा नही दे पायेगे

आप लोग ऐसा कीजीये इस वक्त हमे आपकी और आपके अखबार या चैनल को सरकारी सहायता की जरूरत है. हर दस मिनिट बाद ये एड हर दस मिनिट मे आपके चैनल पर दिखाई देगे,लेकिन अगर अभी भी आप महंगाई का रोना जारी रखते है तो विज्ञापन को भूल ही जाईये,

आने वाले वक्त मे बच्चे से लेकर बूढे तक की जबान पर यही विज्ञापन होगा लोग महंगाई भूल चुके होगे.

बस उसी दिन से जंगल के हर बडे बच्चे के मुंह से यही निकल रहा है बिंदास बोल कंडोम बोल ,सरकार महंगाई शब्द को ही कंडम कर चुकी है,महारानी और राजकुमार जोश मे है ,करकट दमनक और पिंगल मिलकर राजकुमार को गद्दी पर बैठाने की जोर शोर से घोषणा मे वयस्त है जंगल की जनता हमेशा की तरह तॄस्त है.

Wednesday, April 16, 2008

करकट ,दमनक और महारानी

 

जंगल मे महाराज के आकस्मिक निधन हो जाने पर करकट दमनक ने महारानी तो तखत का वारिस घोषित कर अपनी तिकडी को फ़िट करने की बहुत कोशिश की ,पर महारानी ने एक बैल को चुना जो जुगली करने के अलावा सिर्फ़ सिर हिलाता रहता था,लेकिन फ़िर भी महारानी को करकट दमनक और पींगल की सहायता तो लेनी ही पडी.

काफ़ी वक्त गुजर गया, महारानी भी जंगल की राजनीती मे अपनी समझ दिखाने लगी थी ,महारानी ने जैसे ही जंगल मे चुनाव कराने की इच्छा जाहिर की,दमनक ने तडाक से जंगल के कर्मचारियो के वेतन बढाने की घोषणा महारानी से करवा दी.

करकट दमनक और पिंगल पुराने खिलाडी थे,उन्होने तुरंत भाप लिया महारानी अब सीधे सीधे  खुद या फ़िर राजकुमार के नाम पर शासन संभालना चाहती है

पिंगल नाम का सुअर जो हमेशा अपनी थूथनी हर जगह गडाये फ़िरता था,महाराज के खजाने की देख रेख के नाम पर हरएक से कुछ ना कुछ निकलवाने मे उस्ताद था ,उसी ने ने महाराज के  चुनाव आदेश के नाम पर मोटा माल वसूल कर आधा अपने घर भेजा आधा महाराज के पास जमा करा दिया था

जंगल मे व्यापारियो ने पिंगल को दिये पैसे तुरंत पूरे करने के लिये माल की कमी दिखा कर रेट दुगने चौगुने वसूल करने शुरू कर दिये.

जनता त्राही त्राही करने लगी ,बात महारानी तक पहुची,महारानी ने मिटिंग बुलाई ,दमनक ने महारानी को पक्का यकीन दिला दिया की महंगाई कही नही बढी है केवल जंगल मे ये कुछ विरोधी पार्टी के  लाला लोग माल दबाकर मोटा माल कमाने की फ़िराक मे है अगर आपकी आज्ञा हो तो सेनापती को बुला कर माल जब्त करा देते है,जनता को भी लगेगा कि हमने कुछ किया और विरोधी पार्टी के कुछ बंदे भी अपने कब्जे मे आ जायेगे

बाकी सारी जनता आपके ही गुण गा रही है,आप चाहे तो राजकुमार को भेज कर दिखवा लीजीये,महारानी को बात जमी,और राजकुमार जनता के बीच हाथो हाथ लिये गये ,राजकुमार अपना खाना जनता के साथ बैठ्कर खाते और अपना बिस्तर किसी के भी घर मे बिछवा कर रातगुजार लेते ,जनता उन्हे देखने मे लगी थी और दमनक करकट के भेजे चेले उनकी इतनी जय जयकार करते कि उन्हे लगता वो वाकई राजकुमार है और जंगल के मालिक,

लेकिन महगांई तो वाकई मे बढ चुकी थी खाने पकाने का ईधन से लेकर खाने का सामान सभी बाजार मे बहुत महंगा मिल रहा था,ऐसे मे करकट दमनक और पिंगल ने मिलकर अखबार वालो को बुला कर बताया कि जनता के पास आज बहुत पैसे है जिनकी वजह से वोह ढेरो वस्तुये खरीद रहे है महारानी के शासन मे  उनका जीवन स्तर बढ गया है आप देखिये आज बाजार मे कोई इलेक्ट्रोनिक सामान खरीदिये हमने चीन से सस्ते सामान आयात करा दिये है,बाजार मे प्रतिस्पर्धा बढी है,लोगो को चाईनीज थाई इतेलियन खाना खाने की आदते पड गई है जिसके वजह  से जंगल मे उपलब्ध देसी खाना हमने विदेशो मे बेचने वाले किसानो को सबसिडी देकर मोटी कमाई करवाई है देखिये शराब की बिक्री के आकडे बताते है कि जनता के पास बहुत पैसा है हमने जो माल खुलवाये है,दुनिया भर की बडी बडी कम्पनी के जंगल मे खुले आऊट लेट बताते है कि महंगाई कही नही है घंटॊ लाईन मे लग कर फ़िर कही अंन्दर जाने का नंबर आता है,अभी हम आपलोगो की ही मांग पर  जुए के अड्डो को कानूनी रूप देने मे लगे है,और आप कहते है महंगाई बढ रही है  ?

आपलोग सिर्फ़ अपना अखबार चलाने के लिये रोज गलत खबरे दे रहे है,अगर आप इस वक्त हमारा सहयोग नही करेगे तो यकीन रखियेगा हम भी पहले की तरह आपलोगो को पदमश्री वगैरा नही दे पायेगे

आप लोग ऐसा कीजीये इस वक्त हमे आपकी और आपके अखबार या चैनल को सरकारी सहायता की जरूरत है. हर दस मिनिट बाद ये एड हर दस मिनिट मे आपके चैनल पर दिखाई देगे,लेकिन अगर अभी भी आप महंगाई का रोना जारी रखते है तो विज्ञापन को भूल ही जाईये,

आने वाले वक्त मे बच्चे से लेकर बूढे तक की जबान पर यही विज्ञापन होगा लोग महंगाई भूल चुके होगे.

बस उसी दिन से जंगल के हर बडे बच्चे के मुंह से यही निकल रहा है बिंदास बोल कंडोम बोल ,सरकार महंगाई शब्द को ही कंडम कर चुकी है,महारानी और राजकुमार जोश मे है ,करकट दमनक और पिंगल मिलकर राजकुमार को गद्दी पर बैठाने की जोर शोर से घोषणा मे वयस्त है जंगल की जनता हमेशा की तरह तॄस्त है.

Tuesday, April 15, 2008

महगांइ का फ़लसफ़ा

कल तक मंहगाई महगाई का जोर दार ह्ल्ला मचा हुआ था लेकिन हमे भी आज सबूत मिल ही गया ,हम बस पिछले कुछ दिनो की खरीद के बिल देख रहे थे,लोहा हमे पता है बढ गया है ,लेकिन हमे बिल देख कर ही पता चला सफ़ाई वाली झाडू भी अब दुगने दामो पर मिल रही है,पता जला जी ग्लोबलाईजेशन का असर है अमेरिका मे रेट बढ गये है,हमने पूछा भाइ ये तो यही के खेतो की पैदाईश है ना .? ना तो ये अमेरिका से आती है और नाही भारत इसे एक्सपोर्ट कर रहा है फ़िर रेट दुगने कैसे,पता चला मार्केट मे माल ही नही है सारा माल सांसदो ने स्टोर कर लिया है. उसने तो ये हमारे लिय़े खास तौर से मंगा कर दी है.

हमने सरकार से बात करनी चाही तुरंत बात हुई .दिल्ली की मुख्य मंत्री ने बताया कि लोगो के पास पैसे ज्यादा आ गये थे,जिसकी वजह से लोग ज्यादा खाना खाने लगे थे .बस उसी को मैनेज करने के लिये महंगाई बढी है

लेकिन झाडू को कौन खाता है  ? उसके रेट दुगने क्यू जी .. अगर नही बढाते तो पत्रकार लोग हल्ला काट देते कि सरकार झाडू को दलित समझती है  इसलिये बढाने के लिये हमने व्यापारियो से बोला था 

हमने कृषी मंत्री से बात की वो तो सुनते ही भडक गये मै देश के लिये २४ घंटे लगा रहता हू देखिये क्रिकेटरो के रेट बढा दिये तो आपको तकलीफ़ नही हुई जब देश मे पैसा आयेगा तो सबमे बटना चहिये आप किसानो को उनकी उपज का अच्छा पैसा क्यो नही देना चाहते . लेकिन जी किसान तो अभी भी आत्म हत्या कररहे है..? वो उनका शौक है कि आत्म ह्त्या कर मुझॆ परेशानी मे डाले  .

आप अपनी बात करे वरना निकल ले ,मुझे अभी क्रिक्रेट कंट्रोल बोर्ड की मिटिंग मे जाना है. मै तो खाली खाने की वस्तुओ की अचानक बढी दरो के लिये बात कर रहा था

देखिये आज जनता के पास पैसा है ,एक तो वह चुनाव घोषित होते ही इस बार राहुल जी के प्रधानंमंत्री बनने की खुशी मे ज्यादा खाने लगी है जिससे बाजार मे खाने की वस्तुओ की उपलब्धता पर असर पडा है जिससे वस्तुये महंगी हो गई है दूसरे आप उत्तर के निवासी चावल ज्यादा खाने लगे हो और दक्षिण के लोग अनाज ज्यादा खाने लगे है इस कारण ट्रान्सपोर्टेशन मे ज्यादा पैसा लग रहा है एक कारण महंगाई बढने का यह भी है

लेकिन जी झाडू कौन खाता है वोह दुगनी क्यो ? देखिये चुनाव पास है और जनता झाडू का स्टाक कर रही है जिन लोगो ने सोनिया जी को प्रधानमंत्री बनने की राह मे रोडे अटकाये थे उन्हे मारने के लिये बस इसीलिये ये महंगी है आप पिज्जा खाईये ,मैकडोनेल्ड जाईये वहा आज भी पुराने रेटो पर बरगर मिल रहा है .पीने के पानी की दिक्कत है तो कोल्ड ड्रिंक पीजीये या दारू के ठेके अगर आप के घर से दूर है तो सरकार को बताईये हम वही खुलवा देगे .

हमने सोचा इन से बात करना भैस के आगे बीन बजाने से ज्यादा बुरा है तुरंत निकल लिये

अब हमने पकडा अपने महान वित्त मंत्री को जी हमे आपसे महंगाई के बारे ,मे बात करनी थी

कहा है महंगाई आप कोई से शेयर खरीद लीजीये सब सस्ते दामो पर मिल रहे है,आप पता नही किस दुनिया मे रहते है  ?

जी मै खाने की वस्तुयो की अचानक बढी दरो के बारे मे बात कर रहा हू  ?

अच्छा वो देखिये हमने पिछले ही बजट मे डिब्बा बंद कुत्तो तक के खाने के बिस्कुटो के उपर एक्साईज कम करदी थी और इस बार भी नही बढाई है स्पागेट्टी और पास्ता के उपर भी हमने एक्साईज कम कर दी थी ,और इसबार भी नही बढाई है

जी मै इटेलियन नही देसी खाने की बात कर रहा था

देखिये आप लोग क्यू चिपके रहना चाहते है उसी पुराने दकियानूसी खाने से ,जब से सोनिया जी कागेस मे आई है हम लोग केवल डिब्बा बंद भोजन ही करते है या फ़िर पास्ता  ,

आपलोग भी अब अपना टेस्ट बदलिये केवल रोटी के पीछे मत भागिये दूनिया भर मे गेहू का उत्पादन कम हो रहा है हम अब देश मे डिब्बे बंद खाने का आयात करने के बारे मे सोच रहे है आप भी वही खाईये

अच्छा जी झाडू का क्या करे वो दुगनी महंगी क्यो हुई..? हमने स्वाल दाग दिया ,अब तक हम भी चिड चिडा गये थे देखिये इस बारे मे मै सोनिया जी से बात किये बिना कुछ नही बोल सकता,

आप कल आईयेगा अभी मुझे राहुल जी के पास रोड शो के लिये कई गांव मे खाने का पैकेट भिजवाना है आप कल आईयेगा..

Sunday, April 13, 2008

"ब्लोगर्स के लिये पैसा बनाने का स्वर्णिम अवसर"

"आज जब हर और महंगाई बढने की खबरे आ रही है,सरकार कह चुकी है कि लोगो के पास पैसा बढ गया है जिसके कारण लोग ज्यादा खाने लगे है,और इसी कारण महंगाई बढ गई है. ऐसे मे आपको अपने जीवन शैली के स्तर को बनाये रखने के लिये हम आओअको आंमंत्रित करते है पैसे कमाने के लिये
आज सरकार भी चाहती है और लोग भी ,आपको कही भी किसी भी जगह सबसे ज्यादा आसानी से मिलने वाली वस्तू शराब ही है ज्या ग्राहक सुबह छै बजे से रात १२ बजे तक भी लगातार अपनी उपस्थिती दर्ज कराते है.जहा कोई मोल भाव नही कोई उधारी नही,यकीन कीजीये आपके जीवन मे ऐसा मौका बार बार नही आयेगा.हम आपको एंव आपके ग्राहको को ठीक दारू के ठेको के पास दारू के साथ भोज्य पदार्थो के लिये विश्व स्तर की ठेलीया उपल्ब्ध कराने के साथ आपको विश्व स्तर की ट्रेनिंग भी दी जायेगी ,ताकी आप और आपके ग्राहक भी ग्लोबलाईजेशन का लुत्फ़ उठा सके.

रिलायेबल प्रा.लि. पूरे भारत मे समस्त दारू (चाहे वो देशी हो या अग्रेजी) ठेको के साथ लगने वाले ठेलो के लिये सरकार द्वारा अधिकार प्राप्त कम्पनी है.
                                    फ़्रेन्चाईजी के लिये आवेदन पत्र

परिकल्पना:-हमारी इस योजना के प्रथम चरण मे सभी शराब के ठेको के आस पास उबले चने,दाल भुजिया/आलू चिप्स और अन्डे या उससे बने अन्य भोज्य पदार्थ खरीदने वाले ग्राहको को साफ़ सुथरी,सही तथा एक जैसी गुणवत्ता एंव मूल्य की वस्तुओ की आपूर्ती एंव बिक्री सुनिश्चित करना और उन्हे खाली बोतलॊ के सही दाम उपलब्ध कराते हुये इस क्षेत्र मे भी ब्रान्ड नेम की स्थापना करना है इसके अगले चरण मे हम पान/सिगरेट, पंचर लगाने  गोलगप्पे, टिक्की पाव भाजी,खरोडे,गन्ने एंव फ़लो का जूस,बूट पालिश के क्षेत्र मे भी फ़्रेन्चाईजी की योजना प्रस्तावित है
आवेदक:-वे सभी एशिया उपमहादीप के नागरिक जो भारत मे पिछले महीने से निवासरत है या किसी भी भारतीय राजनीतिक पार्टी  के प्राथमिक सदस्य फ़्रेन्चाईजी हो सकते है

  1. २.अपने आवेदन आवेदन प्रपत्र के लिये २५ रुपये का डिमांड ड्राफ़्ट "रिलायेबल.लि.१२२००९,शिकारपुर,झाडसेतली" के नाम भेजे
    फ़ार्म को यह से भी डाउनलोड कर सकते है
  2. आवेदक अपनी जाती संबंधी प्रमाण पत्र जिला स्तर के किसी भी राजनीतिक पार्टी के नेता या पत्रकार/ से प्रमाणित करा कर भेज सकता है
  3. इस फ़्रेंचाईजी की
  4. सामान्य कोटे के आवेदको से ४२००० रुपये अनुसूचित/जाती जनजाती से ४२०० रूपये के ड्राफ़्ट मान्य होंगे
  5. यह फ़्रेन्चाईजी पत्रकार पुलिस,राजनीतिक एंव कानूनविद तथा असमाजिक तत्वो के लिये नही है
  6. अधूरे अथवा गलत ढंग से भरे गये फ़ार्म मान्य नही होगे
    फ़ार्म के साथ रुपये ४२००० का बैंकर्स चैक /डिमांड ड्राफ़्ट "रिलायेबल प्रा.लि.१२२००९,शिकारपुर,झाडसेतली के नाम" न होने पर आपकी कोई दावेदारी स्वीकार नही होगी
  7. फ़्रेंचाईजी देने समबंधी समस्त अधिकार कम्पनी के पास सुरक्षित है
    इस प्रकार के किसी भी मामले मे कम्पनी का निर्णय अन्तिम और वैधानिक होगा
  8. उसे किसी भी न्यायालय मे् कॊई चुनौती नही दी जा सकती,
    फ़िर भी अगर ऐसा कुछ है तो वह रिलायेबल प्रा.लि.१२२००९,शिकारपुर,झाडसेतली के अपने न्यायालय मे ही होगा
  9. रुपये ४२००० का  के नाम भेजे
  10. फ़ार्म को यहा से भी डाउनलोड कर सकते है
  11. टंकण न होने की स्थिती मे साफ़ साफ़ बडे अक्षरो मे काली स्याही वाले पेन से भरे
  12. चुने गये फ़्रेन्चाईजी की सूचना ई:मेल द्वारा दी जायेगी .इस बारे मे आप कोई पूछ ताछ करने के लिये टोल फ़्री न. १६००१६००४२०० डायल करे



रेलैब्ले

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