आपने वो कहावत तो सुनी होगी "गुरू गुड ही रहे और चेला चीनी हो गया" हम यहा प्रसिद्ध कैसे हो की जांच पडताल मे उलझे रहे और समीर भाइ ने तडाक से पढा फ़टाक से बंदा पटाया और चटाक से छप गये,छपे वो भी किसी टुच्चे मुच्चे अखबार मे नही,जनसत्ता मे वो भी एक आधी लाईन घेर कर ही संतोष नही कर लिया ,पूरे छपे जी अपने साईज के हिसाब से .अब हम तो जल भुन रहे है ही ,लीजीये आप भी देखिये और जल कर खाक होने से पहले ही दौड लगाईये पटाईये किसी को..हम भी चले जी क्या पता कोई अखबार नवीस हमे भी होली के मूड मे फ़स ही जाये..होली का दिन है जाने से पहले अंटा लगाना मत भूलना ,और तो और यहा पर समीर भाइ की फ़ोटो भी बडी शानदार आई है जी ,

Friday, March 21, 2008
प्रसिद्ध कैसे हो"की तकलीफ़देह पडताल और समीर भाई का छक्का
Thursday, March 20, 2008
"प्रसिद्ध कैसे हो"की तकलीफ़देह पडताल
लेखक का किसी से कोई राग द्वेश नही है,वह तो सिर्फ़ एक फ़ैलोशिप (जो उसने बडी मुशकिल से जुगाडी है) प्रोग्राम के तहत अपनी पूरी व्यवसायिक इमानदारी से " प्रसिद्ध कैसे हो " पर जो दिखा लिखने के प्रयत्न मे है
"कल कई ब्लोगर्स ने हमे मेल कर हमारे टाईटल पर सवाल उठाया था ,कि आपकी खोज तकलीफ़ देह पडताल मे कैसे बदल गई.तो जनाब आप ही बताये कि हम खुद प्रसिद्ध होने के बजाय ये गूढ ज्ञान आपको बाट रहे है.इससे बडी तकलीफ़ और क्या हो सकती है" तो आईये आपको प्रसिद्ध कैसे हो के अगले भाग मे चले और प्रसिद्ध होने के दुसरे तरीके यानी मीडिया की और...... 
तो इस लेखमाला के पहले खंड मे हम बात करेगे दॄश्य माध्यम यानी चैनल की.अगर आप कुछ जुगाड कर किसी चैनल पर अपने लेखन के बारे मे कुछ परिचर्चा कराले जैसी की एक जमाने मे एन डी टी वी पर नारद की हुई थी,जिसे सुन कर हम भी इस ब्लोगजाल मे आ गिरे थे ,तो आप प्रसिद्धी के कगार पर खडे है,इसके लिये आपको अपने रिश्तेदार और दोस्तो को खंगालना होगा,वो नही तो उनके कोई मिलने वाले जरूर किसी ना किसी चैनल मे काम करते हुये मिल जायेगे,अगर मे कोई ना मिले तो नोएडा जाकर फ़िल्म सिटी के बाहर जाकर खडे हो जाये,वहा दिखाई देने वाला हर आदमी कम से कम आधा पौना तो जरूर किसी ना किसी चैनल मे होता है. अब उसे कैसे पटाये,ये आप जाने आपका काम,अगर हम पटा पाते तो ये तरकीब आपको काहे बता रहे होते.
वैसे पटाने के लिये हम आपको हिंट के तौर पर साईड वाली फ़ोटो दे रहे है,मौका आने पर गधे को भी बाप बनाने वाली कहावत यू भी आपने सुन रखी होगी.अब बात करते है दैनिक पत्रो की. वैसे दोनो माध्यमो के लोग आपस मे हिले मिले रहते है (चोर चोर मौसेरे भाई जैसे,इसे माध्यम वाले अन्यथा ना ले ,आखिर हम भी छपने के जुगाड मे लगे है.हमने सिर्फ़ कहावत कही है)
इसमे आपकी पहुच उच्च श्रेणी के पत्रकारो या किसी चालू चैनल की चिरकुट मंडली तक होनी चाहिये ,अगर आप खुद किसी चैनल से जुडे है,तो आपकी तो बल्ले बल्ले है,फ़िर तो आप तुरंत दो चार लोगो को अपने ब्लोग पर लेखन के लिये आमंत्रित कीजिये,और धीरे से ब्लोगजगत मे इस बात को अवश्य फ़ैलाईये कि आप अमुक चैनल से जुडे महान आत्मा है बस फ़िर क्या,आपकी ब्लोग जगत मे भी चिर्कुट मंडली तैयार है ,आपके ब्लोग पर आपके पोस्ट आने से पहले लोग टीपियाने को तैयार मिलेगे ,आप चाहे कुछ भी लिखे ब्लोगजगत के स्वनाम धन्य बडे बडॆ ह्स्ताक्षर आपके ब्लोग पर टीपियायेगे.जैसी की अब भी यदा कदा दो चार ब्लोग वाले अपना जुगाड लगाकर करा डालते है,कुल मिला कर आपको अपनी गाडी चलानी है चाहे किसी के कंधो पर लाद कर ही क्यू ना चलानी पडे
अब आप अपने काकश को बडा बनाने के लिये कुछ लोगो का इंटर्वियू करा डालिये ,कुछ लेख लिखवाकर किसी दैनिक मे छपवाईये (भाइ यही तो आपके समबन्धो की परिक्षा है) तुरंत उसको किसी चेले से ब्लोगजगत मे दिखाईये ,अब जिनका नाम आ गया है वो तो आपके चिरकुट मंडली के पक्के सदस्य हो गये,बाकी आपके दाये बाये घूमते दिखाई देगे "शायद अबकी बार भैया हमारा भी जिक्र करवादे" बस अब आप उनके और उनसे अपने ब्लोग को पढे बिना ही पसंद अवश्य कराते रहे.
इस बारे मे हमे एक टिप समीर भाई. ने भी दे डाली है,वो है "घर का जोगी जोगना,आन गाव का सिद्ध" यानी अगर एन आर आई है आप पर थॊडा सा भी लेखन वेखन या कही गलती से कविता लिखना आता है तो बस आप अपनी चार छै कविताओ को विदेश मे गये देशीयो ( जैसे हिंदी सम्मेलन मे ,जो ये सारे अग्रेजी दा लोग विदेश मे हिंदी की प्रगति के लिये करते है) के सामने आप दस बीस बार सुना डाले,आपको देसी कवि वैसे ही बडी महत्ता देते फ़िरेगे,(शायद अगले से ही कोई यही बसने का जुगाड ही हो जाये )और कोशिश करके कम से कम कोई प्रदेश सम्मान तो दिला ही देगे प्रसिद्धी के बारे मे तो आप सोचना ही छोड दे वो तो यहा पर बाई प्रोडक्ट की तरह मिल जायेगी.यहा लिखेगे तो तरकश वाले भी आपके तीर को तुक्के से ज्यादा भाव नही देगे,
Wednesday, March 19, 2008
"प्रसिद्ध कैसे हो"की तकलीफ़देह पडताल मे जुटे अरूण के नोट्स
लेखक का किसी से कोई राग द्वेश नही है,वह तो सिर्फ़ एक फ़ैलोशिप (जो उसने बडी मुशकिल से जुगाडी है) प्रोग्राम के तहत अपनी पूरी व्यवसायिक इमानदारी से " प्रसिद्ध कैसे हो " पर जो दिखा लिखने के प्रयत्न मे है
कल आपने चमचा माह्त्य के बारे मे पढा,लेकिन हम अपने वादे के अनुसार आपको किसी की बखिया उधेडकर या किसी की खटिया खडी कर अपने को हिट की हीट नही देना चाहते ,(अगर हम अपना चमचा ब्रिगेड नही बना पाये तो काहे किसी के चमचा काकश मे खलबली मचाये),
वैसे आप इतना तो कर ही सकते है कि आप (जैसा की हमे भी बताया गया था,हमारी ब्लोगिंग के शुरुआती दिनो मे )पर हम इस पर अमल नही कर पाये,जिसके लिये १००% जिम्मेदार हमे हमारे पूर्वजो (हमारे माता पिता,इससे ज्यादा आगे मत जाये ) से मिले वो किटाणु है,जिनकी वजह से हम किसी की भी चमचागिरी नही कर पाते.ऐसा नही है कि हमने अपने आपको बदलने की कोशिश ना की हो,की बहुत की पर क्या करे सफ़ल नहॊ हो पाये.
ऐसा कई बार हुआ कि हमने अपने को समझाया देखो चमचागिरी कोई ऐसी वस्तु नही है कि तुम ना कर सको.तुम्हारे सामने ही कितने व्यक्ती चमचा गिरी कर बहुत बडॆ बडे गणमान्य व्यक्ती बन गये है और अब उनके साथ ढेरॊ चमचो की फ़ौज है,(यहा तक की कई लोगो ने तो हमे मौके भी दिये कि हम उनकी चमचागिरी की छत्रछाया मे आ जाये जिससे वो भी लाभान्वित हो और हमे भी पारितोषिक स्वरूप उपर उठने का मौका मिले) तो इसके लिये हमने कई दिन तक ढेर सारी मोटीवेशन की किताबे चाट डाली.
पर हुआ वही जिसका डर था ,हम इतने जोशो खरोश से चमचागिरी के महान कार्य को करने मे लगे कि जहा १०० ग्राम मक्खन की जरूरत थी वहा बालटियो से उडेल डाला,(नया नया मुल्ला ,अल्ला अल्ला ज्यादा करता ही है) जीतू भाइ को चैट मे कह बैठे ,कि आप तो बिलकुल ही नारद के साक्षात अवतार है ( और उन्होने तुरंत हमे चैट पर ही भैरव बाबा के दर्शनो का सुख दे दिया) ,ई स्वामी को कह दिया जी आप की फ़ोटो लगती ही नही कि आपकी फ़ोटो है लगता है जैसे हम साक्षात आपही को देख रहे है .( वो भी उसी दिन से असलियत मे उपर उठे दो सिंगो को लाकर पालिश कर हमे ही ढूढ रहे है) लिहाजा जिसको मक्खन लगा रहे थे फ़िसल कर गिरा और जब हम उठाने को आगे बढे ,अगले ने गिरे गिरे ही हाथ जोड कर हमे तुरंत चले जाने की अन्तिम इच्छा जाहिर कर दी.आज हमारी चमचो के बाजार मे इतनी पूछ है कि हमारे नाम लेते ही बंदा लट्ठ उठा लेता है
खैर ये तो हमारे साथ हुआ ,हमे नही लगता कि आप की कुंडली मे भी हमारी तरह ही चमचागिरी करने और कराने वाले घर मे राहू केतू की जोडी बैठी होगी . तो आप कीजीये वही काम जिस को करने कि सलाह हमे भी दी गई थी,यानी आप आज बल्की अभी से मेरे ब्लोग पर टिपियाने के बाद एक लिस्ट बना डाले ,सारे बडे (यानी जिन के कई चेले चपाटे हो उन की) ब्लोगर्स की ,अब आप तुरंत काम पर लग जाये ,एक एक कर ब्लोग पर जाये उनकी रचना का अध्ययन करे और टिपियादे, (समीर भाइ को इस लिस्ट से बाहर रखे उन्हे वैसे ही टीपियाने की बिमारी है ,वो रूटीन मे ही आपके ब्लोग पर टिपिया जायेगे.:))
अब आपके इस कर्म से होगा ये कि ये ब्लोगर्स दो चार दिन बाद चुपचाप आपको अपने चमचो मे काउंट करने लग जायेगे,और धीरे धीरे आप पायेगे कि आप के ब्लोग पर टिप्पणिया भी बढ रही है और आप के ब्लोग की चर्चा भी यहा वहा (जैसे चिट्ठा चर्चा मे,आपके स्वामी के साथ अखबारो मे )होने लगी है,
अपने ब्लोग को जब आज हमने खुद ही साफ़ नही रखा है तो आप भी सफ़ाई का ध्यान छोडिये और ढंग से भर कर (टिप्पणियो से)जाईये जी..:)
Tuesday, March 18, 2008
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