Saturday, March 1, 2008

"एक पोस्ट दोस्तो के लिये"

कल का दिन बडा मारी मारी वाला रहा ,यहा ब्लोग जगत पर भी ( काफ़ी सारे लोग कल बैन करो बैन करो वाला खेल खेल कर हिट होने मे लगे थे) देश के लिये भी (वित्त मंत्री बजट के नाम पर देश वासियो को बना वोट के जुगाड मे व्यस्त थे)चैनल वालो के लिये भी,( पूरे महीने से गाल बजा रहे थे,अब तो क्लाई मेक्स का दिन था जी) तथा मेरे लिये भी,(पिछले कई दिनो से चल रही रोटी कमाने की जद्दो जहद की वयस्तता की वजह से )कल के ही दिन मैने/हमने अपनी जीवन का बजट बिगाडने का फ़ैसला लिया था. आखिर हमारी भी तो कोई जिम्मेदारी बनती है जी देश के प्रति.हम केवल देश के वित्त मंत्री कॊ ही अकेले क्य़ो दोषारोपित करे.यानी जिस दिन मैने खुद को पति नाम की एक रबर स्टैंप के रूप मे अपने आगामी जीवन के समस्त अधिकारो के साथ समर्पित कर दिया था उस की की चौथी सालगिरह थी ,और मै भूल गया .वो तो मेरे घर से निकलते समय मेरे १२ वर्षीय पुत्र रवी तथा ७ वर्षीय ॠशभ ने मुझे और मेरी अर्धागंनी को एक कार्ड दिया तो मुझे याद आया ,और तभी जीवन मे शायद पहली बार कार्ड की अहमियत पता चली,
फ़िर दोनो ने स्मवेत स्वरो मे वो कविता सुनाई जो कार्ड पर थी..वाकई मजा दुगना कर दिया दोनो बालको ने .वो कविता तो मै आपकॊ सुनवा नही पाउगा पर अपने जीवन के सबसे प्यारे कार्ड को जरूर आप सब से शेयर करना चाहूंगा , ये अलग बात है की मै ये दिन भी परिवार के साथ नही बिता पाया,और अगली तिथी तक के लिये मैने एक ऐसा मुद्दा ले लिया है जो लगातार मुझे हफ़्ते दर हफ़्ते सुनाया जाता रहेगा..:)

(चटका लगाकर देख पायेगे)

चिठ्ठा इतिहास