Friday, January 25, 2008

"काग्रेसी रामायण" नया इतिहास

आईये..पिछले एपीसोड मे हमने देखा कि काग्रेस सरकार ने कोर्ट मे बताया कि राम फ़ाम नाम की कोई चीज नही है ना थी और हमारे हिसाब से ना ही आगे हम होने देगे..
ये तो बस एक कवि की मन गढंत कल्पना थी जी बस..
ये हिंदू तो सिरे से पागल है जीते ही राम का लेने लेगते है.मरते भी उसी का नाम लेते है,..इनकी चिंता मत करो हमारी ऐसे ही चलती रही तो आने वाले दिनो मे या तो मदर मेरी यीशू या फ़िर अल्लाह अल्लाह कर रहे होगे..
लेकिन फ़स गये थूक कर चाटना पडा..पर भाइ शैतानी दिमांग तो हमेशा खुराफ़ात ही करने मे लगता है..इन्हे गोरी चमडी के तलवे चाटने का इतना ज्यादा शौक है कि फ़िर ले आये नया शगूफ़ा..
और अब इस काम को सर अंजाम दिया है महान प्रधान मंत्री की महान बिटिया डा. उप्पल के..
वो लाई है पदम विभूषण से सम्मानित ए के रामानुजम की किताब दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रो को इतिहास पडाने के लिये..
ध्यान दे इन स्ज्जन को ये पदवी भी काग्रेस सरकार के ही दुष्ट कर्म है..
इनके अनुसार
१.सीता रावण के गर्भधारण के बाद रावण की छीक से जन्मी थी..
२. सीता के रावण से और लक्षमण से अवैध संबंध थे
३. सीता मे इसी कारण रावण को लक्षमण से मरवा डाला
४. राम रावण के दामाद थे
५.हनुमान राम के नौकर थे और सोती महिलाये को द्खने के शौकीन
ये इतिहास पढा रहे है../
और बेशर्मी से दीयू के प्रवक्ता जो एक मुस्लिम सज्ज्न थे का कहना था
ये रिसअर्च के बाद लिखि गई किताब है..हमारे पास तथ्य है..हम दिखा देगे..भाइ जरा बताओ आप्के तथ्य सिर्फ़ हिंदू देवी देवताओ पर ही अर्थ का अनर्थ करने मे आते है और तस्लीमा के केस मे आपकी ऐसी तैसी क्यो हो जाती है..? शायद इम्तिहान सब्र का सब्र टूटने तक लेने की ठानी है पर पता नही जिस सैलाब को ये आमंत्रित करना चाहते है उसे संभाल भी पायेगे..?

आप ही बताये ये क्या चाहते है....पूरा देखने के लिये यह देखे..

चिठ्ठा इतिहास