आज हम अपनी खोज को अचानक बीच मे विराम देकर इस नये तरीके के बारे मे लिखने पर मजबूर है,वैसे हम इसको प्रसिद्ध होने के अन्तिम तरीके के रूप में ही मानते है.(आज हमने अपना सारा ज्ञान एक ही पोस्ट मे उड़ेल दिया है लंबाई की शिकायत ना करे)
देखिये सबसे सस्ता और तुरंत फ़ुरंत प्रसिद्धी देने वाला यह तरीका उन के लिये मुफ़ीद है जिनका ब्रम्ह वाक्य "बदनाम होगे तो क्या नाम ना होगा" होता है,लेकिन कई बार शिखर पर पहुचे लोग भी इस प्रकार के कार्य अपनी प्रसिद्दी को और अधिक बढाने के चक्कर मे करते है जैसे भारत के सबसे महंगे पेंटर हुसैन,या कुछ जाने माने बड़े पत्रकार ब्लोगर्स (हमारे लिये दोनो ही बडे लोग है जी)
कुल मिलाकर आप जब भी इस और जाना चाहे काशी के अस्सी,और मंटो,लोलिता को पढ लें, ताकी अगर कोई आप पर उंगली उठाये तो उसे धमकाने के के लिये आप उदाहरण दे सके,(जैसे अगर आपकी धर्म पत्नी आपको किसी के साथ पकड ले तो आप उसे समझा सकते है कि आप भारत के पहले प्रधान मंत्री नेहरू जी ,अमेरिका के राष्ट्रपति क्लिंटन भी ऐसा ही करते थे,चाहे तो ये पढले) साथ मे कुछ सडक के किनारे पटरी पर मिलने वाली मस्तराम (मस्तराम कपूर नही) की पीली किताबो का भी अध्ययन कर डाले. अब दो चार दिन आप शाम को किसी भी देसी दारू के ठेके पर जाये ,बोतल ले (मसालेदार या सादी ये आपकी मर्जी है ) साथ मे बने "दारू पीने का सरकारी अहाता" मे पहुचे और कम से कम दो से ती्न घंटे बिताये. अब आप इस ट्रेनिंग के दो तीन दिन बाद शाम को जब बोतल आधी खाली हो जाये ,तुरंत लिखना चालू करदे अब आप जो भी लिखेगे यकीन मानिये कालजयी होगा .आपको भी स्वतंत्रता की अनुभूति होगी और आपकी स्वतंत्रता के बारे मे पढने वालो को भी .अब दो चार लोगो से अपने ऊपर कमेंट्स कराये ना हो तो खुद ही करले .जवाब दे और चाहे तो पुन: गरियाकर अपनी स्वतंत्रता का दुबारा डंका पीट दे,तो ये तो हुई शुरुआत.वैसे आप यहा जो जो कर सकते है मै उनको क्रमबद्ध कर देना चाहता हू.
१) आप हिंदू देवी देवताओ को गरिया सकते है..यहा ये बात ध्यान देने काबिल है इस धर्म मे ढेरो देवी देवता है ,तो आधे हिन्दू तो ये सोच लेगे कि जिनको गरियाया वो देवता मेरे वाले नही है लेकिन आपके ब्लोग पर वो जरूर आयेंगे ,टिपियायेगे बेशक नही .(ये लोग खामखा पंगा नही लेते,इसी कारण तो दो हजार साल का गुलामी का गौरव पूर्ण इतिहास है इनका) फ़िर काफ़ी सारे स्वनाम धन्य लेखक आपके साथ (जिनको गाजा पट्टी की ,हुसैन साहब की,या वाटर पिक्चर वाली मेमसाहब की चिंता रहती है) लिखने की स्वतंत्रता के नाम पर आपके साथ खडे हो जायेगे.लेकिन खबरदार अगर गलती से भी ये नुस्खा आपने मदर मेरी , यीशु या फ़िर हुसैन साहब या फिर मुहम्म्द साहब के परिवार के साथ प्रयोग कर लिया ,तो आपका तो साहब अल्ला ही मालिक होगा,अब जितने लोग लेखन की स्वतंत्रता पर आपके साथ खडे होगे ,आपके विरोध मे होगे.तुरंत ये आपके खिलाफ़ मीडिया को लेकर ढोल पीटने लग जायेगे जी.सरकार भी आपको अन्दर करदेगी,चाहे किसी की हो ,वामपंथ की सबसे पहले करेगी जो कल तक आपके साथ हिन्दुओ को गरिया रही थी ( चाहो तो बेचारी बंगाली लेखिका कांड देखलो)
२) आप कही से भी चित्रकारी सीख ले समझ मे आये या ना आये (बनाये जलेबी और नीचे लिख दे जीवन की उलझन) .अब दो चार नंगी तस्वीरे हो सके तो खुजराहो से प्रेरणा लेकर बनाये (शकल चाहे कैसी बने पर महिलाओ और पुरुषो के अतरंग अंग जरूर दिखाई दे)बस .अब इन पेंटिंग को किसी देवी देवता की बताकर किसी छाप दे,देखियेगा आपको कितनी प्रसिद्धी मिलती है .आपका ब्लोग चैनल पर होगा आपका इण्टरव्यू भी होगा,तथा सारी सरकार आपके साथ होगी ,आपके लिये लेख लिखे जायेगे,आपके कार्य की स्वतंत्रता के लिये अमेरिका तक से एड आ जायेगी जी .लेकिन खबरदार अगर आपने ये हरकत किसी और धर्म (हिन्दू धर्म के अलावा कोई भी) के किसी मिथक के खिलाफ़ की तो आप को यही लोग (जो आपके साथ खडे थे) आपको आपके बनाने वाले के हजूर मे भेज देगे.
३) तीसरा काम आप इतिहास लेखन का भी कर सकते है.इसमे भी आप अपने अन्दर की तमाम गन्दगी आप अपने ब्लोग पर उडेल सकते है,आप हिंदू इतिहास मे से किसी को भी उठाईये,और उसके चरित्र की ऐसी तैसी कर दीजीये ,उसकी बीबी को उसकी बहन बता डालिये अगर कोई महिला चरित्र है तो उसके संबंध उसके पति को छोड कर बाकी सबके साथ बता दीजीये.अगर आपकी किस्मत अच्छी हुई तो आपकी किताब नेहरू यूनिवर्सिटी के इतिहास के पाठ्यक्रम मे शामिल हो जायेगी.लेकिन खबरदार अगर आपने किसी और धर्म के बारे मे सोचा.सम्पूर्ण भारत की जमी्न आपके भागने के लिये छॊटी पड जायेगी.
तो ये तो थी ज्यादा बडी प्रसिद्धी पाने की तरकीबे,लेकिन अगर आप ब्लोग मे भी प्रसिद्धी पाना चाहते है तो उपर वाले कार्यो के साथ आप ब्लोगरो और एग्रीगेटर को भी गरिया कर पा सकते है
आप बात करते है स्वतंत्रता की
तो साहब हमारा तो अब ये सोचना है कि जब आदमी जो गालियां जो भाषा अहाते मे या किसी रंगीले (माफ़ कीजीये ऐसा मेरा सोचना है मुझे इन जगहो का ज्यादा तजुर्बा नही है) बाजार मे प्रयोग करता है वही अपनी स्वतंत्रता और जागरूकता के नाम पर अपने ( ड्राईंगरूम)दिवान खाने,बैठक मे प्रयोग करना चाहता है (जैसे शरीर के तमाम अंगो के नाम क्योकी वह सत्य के नाम पर इनके तमाम पर्यायवाची से सबको रूबरू कराना चाहता है) तो वह मेरे ख्याल से अपने और परिवार के सदस्यो के वो कार्य जैसे नहाना, मल मूत्र त्याग इत्यादी भी अलग कमरे (जैसे स्नान घर या लैट्रीन) मे ना करके ड्राईग रूम या चौराहे पर भी करा सकते है.इससे आपकी स्वतंत्रता की अभिव्यक्ती और लोगो तक पहुच जायेगी ,हो सकता है कोई चैनल वाला ही लाईव प्रसारण भी करवा दे.. एक पंथ दो काज,यानी आप प्रसिद्ध भी और साथ मे दुनिया आपकी सादगी से दो चार भी हो लेगी.
आप अपने बच्चो को भी आगे बढाने के लिये घर पर ककहरे की किताब के साथ इस प्रकार की चित्रातमक पुस्तके पढने के लिये देकर उन्हे सारे पर्यायवाची शब्दो की जानकारी दे सकते है,उन्हे बता सकते है,जब आप इस महान कार्य मे लगेगे तो आने वाले वक्त मे आपको कोई कुछ नही कहेगा ,कोई आपके लेखन पर उंगली नही उठा सकता,सब आपकी तरह सत्य को जानने बोलने वाले सरल हृदय लोग बन जायेगे.आपके बच्चो की इस विषय मे इतनी अधिक जानकारी देख कर हो सकता है कोई न्यूज चैनल वाले सरकार तक बात पहुचा दे और आपके बालक देश मे प्रोढ सेक्स एजूकेशन देने के लिये सरकारी नौकरी प्राप्त करले .
मतलब हर तरफ़ फ़ायदा ही फ़ायदा है,बस आपकी खुले ये दिमाग (ब्रोड माईडेंड) बात हम पिछडे संकुचित दिमाग वाले लोगो के पल्ले नही पडेगी ,तो उससे आपको क्या फ़रक पडना है जी" जिन डुबा तिन पाईया " वाली बात है ना,आप आगे बढे ,हमारा क्या है हमे तो यू ही जिंदगी इसी पिछडे बदबूदार घुटन भरे माहौल मे काटनी है,जहा हम बडो के डर से सिगरेट खुले आम गली मे नही पी सकते घर की तो बात छोडिये , दारू के लिये (घर पर कॊई बडा ना देख ले ) छुप छुप कर प्रोग्राम बनाना पडता है..क्या करे जी हम आपकी तरह के माहौल मे नही पले बढे है और अब कोई कितनी भी कोशिश करले नही सुधर सकते ना..
आप इस कार्य क्रम को और अधिक भी बढा सकते है,आप अपने परिवार को भी इसमे शामिल कर सकते है ,अब जब दुनिया को पता है कि आप शादी शुदा है तो जाहिर है कि आप सेक्स भी करते ही होगे,ये भी दुनिया समझती है. तो फ़िर क्या जरूरत है बच्चो के सोने तक मन की इच्छा को मन मे दबा कर रखने की ,या फ़िर आप दोनो कमरे मे अकेले हो इसकी इंतजार करने की..? जब मर्जी हो तब शुरु हो जाये बच्चो का ज्ञान वर्धन हो जायेगा,और आप अगर कही गलत होगे तो बडो से मार्ग दर्शन भी मिल जायेगा,अगर कही मेहमान भी आये हुये हुये तो आपकी सादगी और सत्यता पर मर मिटेगे ,यानी सोने पे सुहागे जैसी बात हो जायेगी. अगर कभी आपको बाजार घूमते या कही किसी और जगह सेक्स की इच्छा बलवती हो तो तुरंत जाहिर करे मन ना मारे,आखिर आपकी आदत तो "जो मन मे है उसे तुरंत उडेल देने की है" वही शुरु हो जाये ,अरे भाइ विदेशो मे भी इसकी स्वतंत्रता है तो यहा भी आपको होनी ही चाहिये ..? जल्द ही आपकी अपनी सादगी और सत्यता भारत भर फ़ैल जायेगी शायद विदेशो मे भी, बस किसी चैनल वाले की नजर आप पर पडने की देर है,हो सकता है कुछ एन जी ओ वाले भी आपको संपर्क करे..तो देर किस बात की जी तुरंत शुरु हो जाये चाहे तो इंडिया गेट जैसी जगह से अपने इस कार्यक्रम की शुरुआत कर डाले .आप खाली ब्लोगजगत मे ही प्रसिद्धी के पीछे काहे वक्त खराब कर रहे है जी..ब>
अब जिसे ये तरीके पसंद आये वह भी टिपियाये जिसे ना आये वो भी टिपियाये और जो इन तरीकों को ब्लॉगजगत में आजमा रहे हैं वो कोई और तरीका जोड़ना चाहे तो टिपियाके जोड़ दे. आखिर मन में जो है उसे उगलना है हमने भी उगल दिया अब बारी आपकी.
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Friday, March 14, 2008
"कैसे प्रसिद्ध हो एक खोज" और विचारो की स्वतंत्रता
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चिठ्ठा इतिहास
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18 लोगों की राय:
आप महान हैं जी।
Sir one month back I read about hindi blogs in Dainik Bhaskar and when I came here i enjoyed reading hindi articles so much that i showed them to my wife and children also. But I did not know then that there are so many dirty things on blogs. I have seen so many abuses, and dirty content on Blogvani that i have banned my 14 year old daughter from reading it.
Even i do not like to see this content nor my wife. Sir, how can we stop the galis, and dirty stuff? please I request you to tell me because i want to tell my neighbours and friends about hindi blogs but cannot because it is so dirty.
You can mail me sir. My email id is : singhairajkumarjain@gmail.com
If possible please also mail me your phone number so that I can talk to you.
Raj Kumar Singhai
Kazi Mohalla, Mungaoli,
Distt. Guna.
ps. Mungaoli is the birth placeof great Indian Journalist Shri Ganesh Shaknar Vidyarthi
अरुण भाई,
सारे सुझाव नोट कर लिया है. लेकिन जी, इस रास्ते से आई प्रसिद्धि पाने के बारे में सोचा ही नहीं कभी. शायद सोचना भी नहीं है. ऐसी प्रसिद्धि से तो अच्छा है कि प्रसिद्ध हो ही नहीं.....बहुत गहरी चोट को बयां करती है आपकी ये पोस्ट.
मुझे आश्चर्य नहीं कि हलके-फुल्के और मजेदार लेख लिखने वाले अरुण जी ने बड़ी गंभीर बातों वाली एक पोस्ट लिखी है. ऐसे में आपकी पोस्ट पर गंभीर टिपण्णी न करना ठीक नहीं होगा. जिन लोगों ने ये रास्ता चुना है प्रसिद्धि का, उन्हें सोचने की जरूरत है.
पंगेबाज जी। आप के बताए सभी इतने पुराने तरीके हैं कि अगर कॉपीराइट एक्ट की जद में आते होते तो भी समय के कारण उस से परे हो गए होते। आज कल एक नया तरीका चला है। जो खास तौर से अल्पसंख्यकों यानी इस्लाम और ईसाई धर्म मानने वालों के लिए है। उन्हें कुछ नहीं करना है केवल भड़ासियों से उन के कुछ प्रिय शब्दों को सीखना है और हिन्दू धर्म को अतिमहान बताते हुए अपने अपने धर्मों को गाली देना है। अब बहुसंख्यक लोग उन पर फिदा हो जाते हैं और जिन्दगी भर के हलवे-पूरी और चरण-चम्पी का इंतजाम हो जाता है।
परिदृश्य दुखद है ।आपकी पोस्ट में झलक रहा है । जिन्होने हिन्दी ब्लॉग जगत को नया नया जाना है वे भ्रमित तो होंगे ही ।
इतना स्पॉंटेनियस तो अपनी पर्सनल डायरी लिखते वक़्त भी नही होते लोग जितना कुछ लोग ब्लॉग लिखते हुए ,जिसे आप सार्वजनिक करने जा रहे हैं ,हो जाते हैं ।
श्लील और शालीन को समझने ,कायम रखने के लिए बाहर से यह फोर्स कब तक जा सकेगी और कितनी कामयाब होगी ,यह सोचने का विषय है ।
पहले ये पता होता तो अब तक कितने प्रसिद्ध हो चुके होते. आप पर लेट लतिफी का मुकदमा दायर किया जायेगा.
सारे नुस्खे चकाचक है. एक नुस्खा चुक गये...की ऐसा लिजलिजा गोल गोल लिखे की आपके साथ अन्य किसी को भी समझ में न आये. यह परम बुद्धिजीविता की निशानी होती है.
!@#$#@ %^&%^ **&
क्या टिप्पणियों में इन्हें अपनाने भर से काम न चलेगा
:) गहरा शोध किया है..
धांसू!!
अनूप जी ने जैसा कहा कि आप महान तो है ही और शोध भी गजब है लेकिन आपकी पोस्ट और उस पर राज जी का कमेंट कई गंभीर सवाल खड़े करता है. क्या हम भविष्य में इस ब्लॉगजगत को बच्चों से बचा कर रखना चाहेंगे. एक ओर तो हम इंटरनैट पर हिन्दी के प्रचार की बात करते हैं और दूसरी ओर राज जी और मुझ जैसे कई और लोगों को दुविधा में भी डालते है कि क्या हमें अपने परिवार , नाते रिश्तेदारों को ब्लॉगजगत के बारे में बताना चाहिये या नहीं.
यहाँ पर ऐग्रीगेटर की भूमिका पर भी सवाल उठते हैं क्या सभी तरह के चिट्ठे इन ऐग्रीगेटर्स पर दिखाये जायेंगे. तो फिर कोई भी यदि पहली बार ऐग्रीगेटर पर आये तो उसे सब तरह की सामग्री मिले. ध्यान रहे दुकानदार भी पीली किताब या नीली किताब छुपा कर रखता है.क्या हमें इन चिट्ठों को छुपा के नहीं रखना चाहिये. मैं कोई जजमैंट पास नहीं कर रहा या नहीं कर पा रहा लेकिन इस पर हम सभी को मिलजुल कर और शालीनता के दायरे में रहकर सोचने की आवश्यकता है.
आपको पोस्ट उसी का मार्ग प्रसस्त करती है.
बढि़यॉं लिखा है अभिव्यक्ति के स्वतंत्रता को सही मायनों में कुछ लोग गिर जाते है। अगर आपके बताये नुक्से अपनाऐं तो उन्हे काफी लाभ होगा :)
बहुत शोध किया होगा आपनें ...सही लिखा है।
देश आपका कृतज्ञ रहेगा. आप जैसा शोध कार्य कर रहे हैं हम लोगों को बहुत ही भा रहा है.
यार ,पंगेबाज़ लोगों की बात ही कुछ और है.
राज द्वारा किया गया सवाल और चिंता बहुत जायज़ है! यहां सवाल नैतिकता का भी है सामाजिकता का भी साथ ही सौंदर्यबोध का भी ! सामाजिक मंचों को सामाजिक उम्मीदों पर खरा उतरना होता है ,लोकरुचि का ध्यान रखना होता है ! भडास को अपने साध्य (अब तक)साफ हैं ब्लॉगवाणी को भी यह जिम्मेदारी और खतरा (?) उठाना होगा !
मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि आप ब्लागवाणी को परिवार के साथ देख पांयेगे. जो आप नहीं देखना चाहते उसे आपको जबर्दस्ती नहीं दिखाया जायेगा.
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बहुत अच्छा शोध किया है आपने. और निश्चय ही हमें ऐसे लोगों के बारे में गंभीरता से सोचना होगा. ये लोग समाज के लिये बहुत बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं.
राज जी की चिंता बिल्कुल उचित है. इसका कोई उपाय हो तो हम भी जानना चाहेंगे.
मैथिली जी व काकेश जी की टिप्पणियों से आशा जगी है कि शायद कुछ उपाय निकल आये.
- अजय यादव
http://merekavimitra.blogspot.com/
http://ajayyadavace.blogspot.com/
http://intermittent-thoughts.blogspot.com/
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