
जब से हमने पढा है की चीन के नेताओ ने अमेरिका को आबादी बढाने के लिये एक करोड महिलाये भेजने की बात की थी,हमे तो भारत के लोगो के सुनहरे भविष्य के सपने दिखाइ देने शुरु हो गये.
हमने फ़ोरन प्रसिद्ध होने के खोज कार्य को साईड मे रखा और इस पर कार्य शुरू कर दिया,देखिये हम कोई नेता थोडे ही है देश के सामान्य नागरिक है और सामान्य नागरिक हमेशा देशभक्त होता है,जाहे मजबूरन ही हो.(सीधी सी बात है जिसे देश की गुल्लक मे हाथ डालने का कोई मौका ही ना हो वो इसके अलावा और कुछ कर भी कैसे सकता है) अत: हमारे लिये सबसे पहले देश है,
देखिये हम ये मान सकते है (आखिर चीन मे राष्ट्रपति ने कहा है) की चीन की आबादी बढाने मे सिर्फ़ और सिर्फ़ चीनी महिलाओ का हाथ है, बिलकुल होगा जी ,हमे भी चीन के बारे मे कोई ज्यादा जानकारी नही है जी, पर भारत मे ये बात हम नही मान सकते.यहा तो हमने अकसर महिलाओ को बच्चो को पीटते और यही कहते सुना है ऐसे बच्चो से तो मै निपूती भली. हमारे यहा तो नारिया ही बाल गोपालो की पालक होती है,और मै नही मान सकता की वह सिर्फ़ और सिर्फ़ देश की आबादी बढाने के लिये ही अपना योगदान देने मे लगी रहती होगी.अब आप ही बताये कॊइ भी महिला काहे खामखा देश की आबादी बढानी की मुहिम के चक्कर मे अपनी व्यस्त दिनचर्या को और अधिक व्यस्त बनाना चाहेगी..? हमारे देश मे जहा पुरुष महिलायो को दबा धमका कर रखने के लिये बदनाम है, महिलाये उनसे कैसे जबरदस्ती आबादी बढाऊ कार्यक्रम मे योगदान ले सकती है..?
इसका सीधा सा मतलब निकलता है की हमारे देश मे ये काम सिर्फ़ और सिर्फ़ पुरुषो के ही जिम्मे आता है,वही महिलायो को डरा धमका कर इस कार्य को कर रहे है..यानी अब यह तय हो गया है कि भारत मे पुरुष ही १००% जिम्मेदार है आबादी बढाने के
तो हम अब अमेरीका से अपने संमबंधो को नया आयाम दे सकते है,अपने समबंधो को और अधिक प्रगाढ और गर्म जोशी से भरपूर कर सकते है..
देखिये अभी पिछले दिनो हुये एक सर्वेक्षण से हमे पता चला था की भारत मे ३५ साल तक के जवानो की संख्या ३०/३५ करोड है ,अब अगर उसमे से दो /तीन करोड को इस कार्य क्रम के तहत अमेरिका भेज दिया जाये तो हमारे यहा रोजगार की समस्या काफ़ी हल हो सकती है.ये नौजवान खुद जायेगे ,और बाकी भाई भतीजो को भी वही बुलाने के जुगाड मे लग जायेगे,ये आप जानते ही है कोई भी भारत वासी अपने जीवन मे अमेरिका जाने और वहा से कभी ना वापस आने का सपना बचपन से ही पाले होता है.
आप सोच कर देखिये आने वाले सालो मे भारत वंशी ही अमेरिका के सत्ता शीर्श पर बैठे होगे..हिंदी के उत्थान के लिये
आप सब ब्लोगर्स पर पडा वजन कितना कम हो जायेगा.बस हमे करना सिर्फ़ इतना होगा की वहा जाने वालो के लिये अग्रेजी ना आना भी एक योग्यता रखनी होगी..
नेताओ को भी कुछ दिन काम मिल जायेगा,वहा जाने वालो के लिये सामान्य कोटे,एस.सी/एस.टी,कोटे अल्प संख्यक कोटे को तय करने के चक्कर मे सारे अमेरिका आने जाने मे लगे रहेगे..
और सबसे बडी बात यह होगी पहली बार भारत अमेरिका के सर्वागीण विकास मे सहभागी बनेगा..इस प्रकरण के बाद यही संधी हम अन्य देशो के साथ भी कर सकते है जहा जन्म दर लगातार कम हो रही है जैसे जापान .मतलब भारत इस प्रकार के कार्यो के लियॆ एक आऊट सोर्सिंग हब के रूप के निखर कर आयेगा,आज तक हम सिर्फ़ किडनी गुरदा फ़ेफ़डा,दिल जिगर गुरदा ही भेजते रहे है, आईये हम सब मिलकर इस योजना का प्रारूप भारत सरकार कॊ भेजने की मुहिम मे शामिल हो ,आखिर चीन ही क्यो,हमारे देश वासी हर जगह दुनिया मे आगे दिखने चाहिये..
Monday, February 18, 2008
नया रोजगार भारतीयों के लिए
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11 लोगों की राय:
अरुण जी,
अद्भुत खोज में लगे हैं भाई. बहुत बढ़िया.
और हाँ, वो प्रसिद्धि पाने वाली रिसर्च अगर आगे बढे तो उसका दूसरा भाग प्रस्तुत कीजियेगा.
अरुण भाई,
'धमकी' का तार तो बाद में मिला. सज्जनता का सुबूत 'धमकी' से पहले ही दे दिया था............:-)
अच्छी कल्पना है
अरुण भाई,जाने का कोई जुगाड बने तो हमारा नाम भी लिस्ट मे लिख लो.
सही है जी!!
चीनी महिलाओं के साथ भारतीय पुरूष निर्यात किये जायें, बाकि का काम अमेरीका में निपटाया जायेगा...
ये सब फोटूआ कहाँ से लाते हो भाई. :) मजा आ जाता है.
भैयाजी, बिल्कुल ओरीजिनल माल दिखाया है आपने( हमेशा की तरह).
माल पसन्द आया. आगे फार्वर्ड कर दिया है.
माल-मत्ता पर जो लोग-बाग राय देते रहे , उसमें आनन्द आने से मज़ा दूना हुआ.
सबसे अच्छा लगा भाई संजय बेंगाणी की उम्दा और (फिर) ओरीजिनल राय-कच्चा माल चीन का, मेहनत हमारी और उत्पादन अमरीका का ?
क्या बात है ...?
संजय बेंगानी के मल्टीनेशनल आइडिया पर तो हम फिदा हो गये। इस काम के लिये कोई कम्पनी बनने वाली हो तो उसके कुछ शेयर खरीदेंगे!
भेजे वालों को
मत भेजो
किस किसके
पास भेजा है
बोलो ?
Interestinghtr post
.
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