वीर तुम बढ़े चलो !
धीर तुम बढ़े चलो !
हाथ में पद रहे
देश गर्त मे रहे
कुर्सी सदा मिली रहे,
डेमोक्रेसी तुम्हारी चली रहे
वीर तुम बढ़े चलो !
धीर तुम बढ़े चलो
तुम कभी डरे नही
अपने किसी अपमान से
मतलब तुम्हे है कहा
देश के स्वाभिमान से
मतलब तुम्हे बस कुर्सी से है
केचुये सी शान से
वीर तुम बढे चलो
धीर तुम बढे चलो
सोनिया के छक्के हो
या आस्ट्रेलियन के धक्के हो
तुम रास्ता निकाल लो,
पल्टी तुरंत मार लो
पवांर तुम बेईमान हो,
देश का अपमान हो
वीर तुम बढ़े चलो !
धीर तुम बढ़े चलो !
!
रिजेक्ट माल से साभार
देश के स्वाभिमान का
सौदा करो तुम शान से
नोट की कीमत हैज्यादा
खिलाडियो के अभिमान से
चाटुकारिता से बढ़े चलो
चरणॊ मे पडे चलो
वीर तुम बढ़े चलो !
धीर तुम बढ़े चलो
विदेशियो का ध्वज लिये हुए,
एक प्रण किये हुए
गोरी चमडी के लिये ,
काग्रेस संसकृति के लिये
वीर तुम बढ़े चलो !
धीर तुम बढ़े चलो ! !
देश सारा खुला पडा,
जयचंदो को भी पालती है ये धरा
जम कर माल निकाल लो,
विदेशी खातो मे डाल लो
शर्म तुममे मे है कहा,
बस नोचने की बेताबिया
हमे थी तुमसे कुछ उम्मीद कहा,
लूट खसौट के सिवा
तुमने और क्या किया,
पेट भरने के सिवा
वीर तुम बढ़े चलो
धीर तुम बढ़े चलो !
नोट बस गही धरो ,
आई सी सी के चेयर मैन बनो
Wednesday, January 9, 2008
पंवार को श्रद्धांजली"
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5 लोगों की राय:
अरूण जी,बिल्कुल सही लिखा। यह नही सुधर सकते।बढिया पेरोडी, व्यंग्य रचना है।
आपके ये वीर बढ़े ही जा रहे हैं, अब तो इन्हें रोकने के लिये कुछ कीजिये.
"तुम कभी डरे नही
अपने किसी अपमान से
मतलब तुम्हे है कहा
देश के स्वाभिमान से
मतलब तुम्हे बस कुर्सी से है
केचुये सी शान से
वीर तुम बढे चलो
धीर तुम बढे चलो"
bahut shandar
वाह! पवार की शान में क्या स्वाभिमान और क्या अपमान। पैसे में सब कुछ जान!
श्रद्धांजली तो जिन्दों को नहीं दी जाती इसलिये आपका शीर्षक गलत है.
या आप पवार की जिन्दगी को जिन्दगी ही नहीं मानते
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