
नया साल है ,हम भी सोच रहे है कि हवन करादे पर डर लगता है ..कही कोई ये ना समझ बैठे कि काग्रेस अध्यक्षा की बिमारी का कारण हमारा हवन है..पहले एक बार कराने की सोच ही रहे थे कि मनमोहन जी मे बता दिया था की मेरे विरोधी हवन करा रहे है.. डर के मारे कैंसिल कर दिया..अब हम खामखा मे इतने बडे पंगे तो नही ना ले सकते जी..और अगर किसी ने ये समझ लिया कि हम समर्थन मे है तो लेफ़्ट राईट वाले दुशमन समझ बैठेगे..पिछले हफ़्ते पंडित जी को वापस करना पडा..कि किसी पत्रकार भाइ को पता चल गया तो हम हाट न्यूज होगे ..मोदी की जीत की खुशी मे हवन कराया..
दरसल ये हवन भी अब राजनितिक हो गया है..काग्रेस की गुजरात हार का कारण भी यही हवन रहा..काग्रेस ने बीजेपी के कई बडे नेताओ के सहयोग से वहा मोदी को हराने के लिये हवन का प्रबंध किया था..पर मोदी ने करने नही दिया और खुद कर डाला..वरना काग्रेस कम से कम तीन चौथाई बहुमत से जीत जाती..
..ये उसी हवन की धसक थी कि काग्रेस अध्यक्षा को खासी आ गई ..और आई सी यू मे पहुच गई..अब भाइ ये बडे लोगो के चोचले है यहा तो आदमी पांच सात दिन तो ये ही सोचने मे गुजार देता है कि डाक्टर को दिखाऊ या अभी दो दिन और देख लू..और आई सी यू तो उसे तभी मिलता है( अगर किस्मत अच्छी रही और दिखाने जाने वालो के पास मोटा पैसा और खर्चने का दिल दोनो हुआ तो) जब उसके शमशान जाने का वक्त आ जाता है..
कई बार तो असपताल वाले मुर्दे कॊ भी दो चार दिन आई सी यू की देख रेख मे रख डालते है जी..
ये तो इनकी देश के प्रति दया भावना है कि ये यही दिल्ली के अस्पताल मे चली गई..वरना विदेश भी जा सकती थी इन्होने कोन सा बिल पेमेंट करना होता है..वो तो देश के नागरिक की जिम्मेदारी है इन हाथियो को पालना..
मै भी कहा से कहा पहुच गया जी बात चल रही थी हवन की..तो ताबड तोड असपताल मे डाक्टरो की देख रेख मे वही काग्रेस अध्यक्षा के लिये हवन समपन्न हुआ.. असपताल का नियान साईन बोर्ड भी हैप्पी नयू इयर कहने लगा और भीड गेट वेल सून..बाकी असली मरीज बाहर कर दिये गये ..भाई अभी घर जाओ..अगर दो चार दिन बाद जिंदा बचे तो फ़िर दिखाने आ जाना..तब देखेगे..भगवान से दुआ करना कि अभी तो तुम भी घर जाकर हवन कर सको..बाकी नही बचे तो घर वाले अंतिम हवन तो कर ही देगे..
अब ये हवन इतना राजनितिक हो गया है कि मेरॊ बुद्ध देव ( मुख्य मंत्री प. बंगाल) से बात हुई ,उन्होने तब असली बात बताई नंदी ग्राम की..कहा की लोग इकट्ठे होकर मेरे खिलाफ़ हवन करने की जुगाड मे थे..तब मुझे अपने कैडर और पुलिस को वहा भेज कर उस्को बंद कराने के लिये ये सब करना पडा..
तो मै हवन कराने से पहले यहा अपने ब्लोग पर स्पष्ट बता देना चाहता हू कि मेरे यहा होने वाले हवन से किसी भी राष्ट्रीय.प्रांतीय राजनीतीक अराजनीतीक पार्टी,ब्लोगर्स दोस्त रिश्तेदा्र जिनको मै जानता हू और जिनको मै नही भी जानता व्यक्ती विषेश से कोई संबंध नही है..ये मेरे अलावा किसी भी् व्यक्ती के समर्थन या विरोध मे नही किया जा रहा है..इसके किये जाने से मिलने वाले पूरे फ़ायदे और नुकसान का मै ही इकलौता जिम्मेदार हूंगा..
ब्लोगर्स साथियो से खास तौर पर.. आपके ब्लोग पर हुई या होने वाली किसी परेशानी या ट्रैफ़िक से मेरा या मेरे हवन का कोई लेना देना नही है..
Wednesday, January 2, 2008
नये साल का हवन
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3 लोगों की राय:
हवन का ये असर? तो आपकी पोस्ट पढ़कर लगता है कि कांग्रेस को अब हवन के खिलाफ कानून बनाना पड़ेगा.
अरुण जी,
बढिया रहा ये लेख.. साल के शुरूआत में..
आपको सपरिवरनव वर्ष की शुभकामनायें.
चलते चलते एक और बात याद आ गई... यदि आपके पास सुनिता जी के यहां कविता पाठ की मेरी कोई क्लिप हो तो क्या आप मुझे मेल कर सकते हैं.
बहुत इन्टेरेस्टिंग लिखा है पंगेबाज भाई;
मज़ा आ गया
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