
जी हा ये नया साल ही है..पर किसके लिये..? जरा नजर घुमाईये सर्दी की इस रात मे, इस देश का नगरिक होने का गुमान पाले वोह शख्श जिस के दम पर सरकारे बनती बिगडती है..जिस को वोट देने का सबसे ज्यादा जोश और होश है ..वोह तो रात गुजारने के लिये कही जल रहे अलाव को ढूढता फ़िर रहा था ,या फ़िर कही ताक मे था कि किसी दुकानदार के छोडे हुये बारदाने के ढेर मे कही एक गत्ते का बडा सा डिब्बा ही हाथ लग जाये.जिस मे घुस कर ही वो इस सर्द हवाओ से बच कर कम से कम आज की रात तो गुजार ले कल की कल सुबह का सूरज बतायेगा..कि वह इस नये साल के जश्न की रात के बाद वह अगली सुबह देख पाया या नही...
जी नही नया साल..कैसा नया साल..? उसे क्या लेना नये साल से..उसके लिये तो कल सुबह गर जिंदगी शेष रही तो फ़िर वही पल्लेदारी या फ़िर रिक्शा खीचना है..या फ़िर अपने खेत मे कुछ बोने के लिये पैसो का जुगाड करने निकलना है ...
नया साल का आगमन तो था उन बिगडैल रईस जादो के लिये जिनके ब्रोड माईडॆंड मा बाप आज रात किसी पार्टी मे व्यस्त थे ,और वो अपनी ही जैसी किसी ब्रोड माईडॆंड मा बाप की दुलारी के साथ किसी होटल मे पार्टी मे जा रहा था..जहा पहले उसे दोस्तो के साथ टुन्न होने तक नाचना गाना था..और फ़िर जस्ट फ़ोर फ़न वो रात पहले से बुक किसी होटल के कमरे मे गुजारनी थी..भाई यादगार जो बनानी थी ये रात...
क्या आपको अंदाजा है इस साल इस साल के अंतिम दिन कितनी दारू बिकने वाली थी...नही ..? जरा सा अंदाजा तो लगाईये जनाब..इस साल बहुत पैसा आया है देश मे..? जनाब ये लगभग एक खरब का धंधा था केवल इस अंतिम दिन का..यकीन नही आय ना..
जनाब मै आपको बताना चाहता हू कि चैनलो के प्रताप से इस देश मे बहुराष्ट्रीय कम्पनियो के फ़ैलाये इस जाल की कॄपा से कल की रात आपको किसी भी होटल मे कोई कमरा खाली नही था..खरबो का धंधा है जी ये..खाली दिल्ली मे करोडो के फ़ूल बिक गये है...
साल की इस रात कोई सेक्स वर्कर खाली नही थी ..सबके रेट दुगने से ज्यादा हो चुके थे..दल्ले कई दिनो से कमाई मे लगे थे..पुलिस वाले बिना हफ़्ता दिये धंधा करने वालो को पकड कर अपने नंबर और नाम दोनो कमा रहे थे..कोर्पोरेट जगत इस महीने लोगो को पकड पकड कर बोतल या फ़िर पार्टी की टिकट या फ़िर फ़ुल फ़लैश रूम बुकिंग (बंदे की औकात के हिसाब से)और इंटर टेन मैंट के लिये मुंबई से दिल्ली और दिल्ली से मुंबई की सप्लाई के लिये ऐयर टिकट की अरेंजमेंट मे बिजी थे ..सारॊ एस्कार्ट सर्विस फ़ुल्ली बुक्ड थी जी.अब आप मेरे से ये एस्कार्ट सर्विस के बारे मे मत पूछ बैठना जी...
सारी की सारी फ़िल्मी तारिकाये पैसा कमाने के लिये व्यस्त थी ...हर किसी को इसी रात से २/३ करोड कमाने थे जी..२०/२० मिनिट की तीन चार प्रस्तुती देकर..अब अगर कोई २५/५० हजार देकर देखने पहुचा थे तो भाइ कपडे पहने हुये थोडे ही देखेगा..अब अगर चैनल वाले इन्ही लोगो को दिखा दिखा कर नये साल के आगमन मे पूरे भारत को ही मस्त दिखा रहे है तो मै कर भी क्या सकता हू..
जो आदमी महीने मे १०,००० कमाता है उस्की औकात से बाहर है ये मस्ती ..आखिर मरे से मरा टिकट १५००० से उपर का है जी..और बाकी खर्चे अलग.. आपही सोचिये चैनल और आई टी वालो को छॊड कर कितने लोग है भारत मे जिन्हे महीने मे १०,००० र्पये मिल पाते होगे..१% भी नही निकलेगे जी
इनका था जी नया साल... इन्ही का था जी ये नये साल का त्योहार..हमे आपको तो वही पुरानी रजाई मे घुस कर टीवी देखते हुये ज्यादा से ज्यादा रात को दो चार मिलने वालो को जगा कर हैप्पी नयू इयर कहते हुये सौ जाना थे..
क्या यही है नया साल और उसके आगमन का तरीका...आधी रात तक दारू पीकर टुन्न होकर अधनंगे होकर नाचते रहना फ़िर गाडी की चाबियो का खेल या फ़िर लाईट बंद कर जो मिले उस को चुनने का खेल..क्या यही हमारी संसकॄती है..? क्या यही तरीका है ..या फ़िर कही किसी फ़ार्म हाऊस मे हिरोईन चरस गांजा पीकर वही उसी प्राकृतिक या अप्रकृतिक खेल मे लगे रहना..?
अरे मै क्या ले बैठा जी नया साल के पहले सूरज का स्वागत करे हम आप मिल कर..खुशिया लाये ये जीवन मे आप सबके..
बाकी पिछली रातो को जग कर नये साल के आगमन मे लगे बंदे तो थक कर चूर होकर सो रहे है...उनहे तो हम कल ही नये साल की बधाईया दे सकेगे....
नोट:- किसी भी छापी गई सामग्री के अशलील या शलील होने के लिये लेखक जिम्मेदार नही है..सभी सामग्री दूरदर्शनी पर पहले ही दिखाई जा चुकी है..
Tuesday, January 1, 2008
क्या यही है नये साल मनाने का ढंग
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
चिठ्ठा इतिहास
-
▼
2008
(41)
- ► 04/13 - 04/20 (5)
- ► 04/06 - 04/13 (4)
- ► 03/30 - 04/06 (4)
- ► 03/16 - 03/23 (4)
- ► 02/10 - 02/17 (4)
-
►
2007
(124)
- ► 12/30 - 01/06 (4)
- ► 12/23 - 12/30 (5)
- ► 12/16 - 12/23 (5)
- ► 12/09 - 12/16 (4)
- ► 09/23 - 09/30 (1)
- ► 09/09 - 09/16 (4)
- ► 09/02 - 09/09 (5)
- ► 08/26 - 09/02 (4)
- ► 08/19 - 08/26 (3)
- ► 08/12 - 08/19 (3)
- ► 08/05 - 08/12 (4)
- ► 07/29 - 08/05 (1)
- ► 07/22 - 07/29 (3)
- ► 07/15 - 07/22 (5)
- ► 07/01 - 07/08 (4)
- ► 06/24 - 07/01 (4)
- ► 06/17 - 06/24 (3)
- ► 06/10 - 06/17 (6)
- ► 06/03 - 06/10 (4)
- ► 05/27 - 06/03 (4)
- ► 05/13 - 05/20 (5)
- ► 05/06 - 05/13 (4)
- ► 04/29 - 05/06 (4)
- ► 04/22 - 04/29 (6)
- ► 04/15 - 04/22 (9)
- ► 04/08 - 04/15 (13)
- ► 04/01 - 04/08 (5)
- ► 03/25 - 04/01 (1)
- ► 03/18 - 03/25 (1)


11 लोगों की राय:
सबका अपना अपना तरीका होता है जी;
हमारी ओर से भी नये साल की बधाई स्वीकार कीजिये
साल मुबारक.
बस अब और क्या कहूँ... नया कैलेण्डर मुबारक हो... क्योंकि कैलेण्डर के अलावा तो कुछ नया दिखा नहीं मुझे...
पंगेबाज
दिखा रहा है
नए साल पर
नंगे आज।
नया साल आपको पहले से और भी बेहतर कुछ दे जाए! नए वर्ष की शुभकामनाएं
समाज, धर्म, एवं शालीनता को भुला कर मनाया जाने वाल नंगा नाच कतई भारतीयों के लिये उचित नहीं है.
ढंग देखा, रंग देखा
पायजामा तंग देखा
आते नया साल देखा
आदमी का हाल देखा
बहुत खूब पोस्ट अरुण जी....नया साल ढेर सारी खुशियाँ लाये, यही कामना है.
नव वर्ष मंगल मय हो
मय से दूर रहे तभी मंगल होगा
जमाये रहिये
नया साल आपके और आपके परिवार के लिए खूब सारी खुशियाँ लेकर आये।
अगले साल देखेंगे आप क्या दिखाते हैं!
Post a Comment