Saturday, December 29, 2007

"आपके लिये नये साल की विश"पंगेबाज की तरफ़ से

आप कही ऐसे ना फ़से..

आप कोई ऐसा पंगा ना ले बैठे...

आपको सोते समय भी ऐसे भयानक सपने ना दिखाई दे...


आपको ऐसी सवारी मे ना बैठना पडे...


आप पश्चिमी तरीके का कमोड तो प्रयोग करे पर आपके साथ ऐसा ना हो....


ना ही ऐसा हो...



आपको इसकी जगह चांद पर जाने का मौका मिले...



आपकी गाडी आपको धोखा ना दे और कम से कम ऐसे तो नही ....


आपस मे प्यार और सौहार्द बढता रहे ..दुशमनो से भी...


आप उचांईया तो छुये पर ऐसे नही...


और अंत मे ..देख पराई चूपडी मत ललचावे जीव..

Friday, December 28, 2007

"कॄपया इतनी भी हवा ना भरे"

क्या बात है जी ..हम तो बस ज्ञान जी से ही छोटा सा पंगा लेने के मूड मे थे कि महाशक्ती ने तो हमे सिरे से ही ऊखाड दिया..भाइ नाराज ना दर असल मुझे लगा की ब्लोग जगत से कटे रहने से अच्छा है कि चित्रो के सहारे ही जुडे रहो..लेकिन आपकी बात सिर माथे पर लीजीये ताजे ताजे रहीम जी के दोहे पढिये जो हमे उन्होने रात सपने मे सुनाये थे,...
"रहिमन नये विचार ते जडमत होत सुजान
बूढो जब तक सोच करे,नयो काट ले कान"

अर्थात रहीम दास जी कहते है.नये विचारो और नये लोगो की हमेशा कद्र करो,उससे आने से जडबुद्धी भी सुजान यानी चतुर हो जाता है..जब तक पुराने यानी बडे बुजुर्ग कुछ करने से पहले सोच विचार मे उलझे रहते है नया बंदा कान काट कर मतलब अपना कार्य कर चला जाता है...

"कह रहीम निज संग लै, जन्मते लीडर न कोय
लूट खसौट मारकाट सब,सीखत सीखत होय"

अर्थात रहीम दास जी कहते है की हे मनुष्य जन्म से कोई लीडर नही होता,कोई अपने साथ नेतागिरी का गुण लेकर पैदा नही होता,वह तो यहॊ इस दुनिया मे लूट खसौट,अपहरण बलात्कार हत्या सब सीख सीख कर बनता है..अर्थात तू डर मत शुरू होजा अभी भी देर नही हुई है,तू नेता बनने के अभ्यास मे लग नेता बन सकता है...


"भीत गिरी पाखान की, मच ग्यो रे कोहराम
कह रहीम सुजान वहै, बेचे प्लाट वही ठाम"

अर्थात रहीम दास जी कहते है जब पुराना मकान गिरा तो वहा शोर मच गया लोग दब गये.लेकिन इस हाहाकार मे भी वही सुजान है जो उसी वक्त वहा प्लाट काट बेच कर पैसा जेब मे लेकर निकल लिया...


ज्ञान दादा अब इतनी भी हवा ना भरे कि...

मेरा हाल ऐसा हो जाये..


मै तो बस कोशिश यही करता हू कि ...

अब ये खिचे ना खिचे अलग बात है..पर कोशिश तो मै करना जारी रखुगा...:)

एक अच्छे पूर्ण समर्पित ब्लोगर की तरह...


अपने से बडा काम करने की..(पंगा ही सही)


पत्थरो से भी करा लेते है लोग अपनी मर्जी से काम..बस जरूरत है धैर्य और अभ्यास की



कर दिया ना उलटा खडा..

भूल गया अपना वजन .और गुरुत्वाकर्षण का नियम...



क्या बैलेंस है..काश हम भी जिंदगी मे ऐसा कर पाते....

लेकिन ये जो सज्जन है उपर और नीचे इन्हे पत्थरो कॊ भी उंगलियो पर नचाने की आदत जो है...

Thursday, December 27, 2007

"बस यू ही"

ओह... वाकई मे बियर पेट ज्यादा ही भर देती है


अब मुझे भी गन ले ही लेनी चाहिये


इनसान जब जानवर बन सकता है तो हम इनसान क्यो नही...?


क्या सीन है...?


नये फ़ैशन की पैंट है..जल्ते काहे हो भाई..?


ये है मेरी असली शकल


अब निकल भी ले अगर गिर गया ..तो तू गया काम से


छुपा छुपी खेले आओ...


हे हे अब हम हेल्मेट लगाकर ही काम पर आते है..


आज कुछ ज्यादा ही हो गई है..

Wednesday, December 26, 2007

"क्रिसमस का तोहफ़ा दिल्ली सरकार का"



खुश हो जाइये की आप दिल्ली मे है..लेकिन ये खुशी आपको तभी मिल सकती है जब आप मे कम से कम पाच या तीन सितारा या फ़िर संसद या बिधान सभा मे रोज खाना खा सकने की जुगाड या औकात हो..
अरे आपको नही पता इस क्रिसमस पर दिल्ली सरकार ने दिल्ली की जनता को जो तोहफ़ा दिया है..उसके बारे मे..?
दिल्ली सरकार राजधानी वासियो की चिंता मे दुबली हुई जा रही है और आप है के पता ही नही रखते..लानत है आप पर
यानी आप खामखा ही शीला जी को कोसते रहते है..
तो लीजीये हम ही बता देते है..
कि श्रीमती दीक्षित ने राजधानी वासियो की सेहत के लिये १२० करोड रुपये की लागत से एक मैकेनाईज्ड चिकन ड्रेसिंग प्लांट
लगाने का फ़ैसला किया है जिससे दिल्ली वासियो को पौष्टिक और गुणवत्ता युक्त चिकन हासिल होगा..ये प्लांट प्राईवेट पार्टनर शिप के तहत होगा ..यानी अगर सरकार चली भी गई तो शीला जी दिल्ली के होटलो मे मुर्गे तो सप्लाई करती ही रहेगी जी..
कैसा आईडिया है रमेश बाबू.. बढिया है ना..बस केबल दिन मे ८०,००० से १२०,००० मुर्गे ही काटा करेगी जी ज्यादा नही... अब अगर इस कार्य मे दिल्ली वासियो को लगता है कि मुर्गो का तो पता नही लेकिन उनके कटने के हालात पूरे पूरे है जी तो शीला जी की क्या गलती ..? वैसे भी गुजरात से मोदी को काटने मे नाकाम होकर लौटे थके हारे नेता और पत्रकारो का ख्याल वो नही तो और कौन रखेगा...काग्रेस सरकार हमेशा से इन सब बातो मे आगे रही है जी..
जब प्रधान मत्री/वित्त मत्री संसद मे (काग्रेसियो के खाने के लिये )कुत्तो के खाने के डिब्बा बंद बिस्कुट और स्पागेत्ती तथा इटेलियन खाने के दाम कर जनता के उपर उपकार करते है तो इतना हक तो दिल्ली वासियो को चूना लगाने का शीला जी का भी बनता ही है..बस अब वाम दलो के लिये मछलियो का क्या प्रबंध प्रधानमंत्री जी और शीला जी करते है ये देखने की बात होगी...? ये अलग बात है कि जिन अल्पसंख्यको की उन्हे चिंता रहती है वो यहा से मुर्गे नही खा सकते.. काहे कि बिना कलमा पढे तो भाइ वो छुयेगे ही नही फ़िर इतने मुर्गे कहा बेचेगी जी दिल्ली के लोगो के पैसे खर्च करा कर...या फ़िर वो वहा आटो मैटिक कटाई के साथ आटो मैटिक कलमा पढने के लिये भी मशीन लगवाने वाली है जी...?
वैसे अब देश वासियो को तैयार हो जाना चाहिये कि वो सरकार से रोटी रोजी के बजाय ब्रेड.मुर्गे,पास्ता स्पागेट्टी,बिस्कुट (कुत्तो वाले नही वो तो सिर्फ़ नेता खाते है) दारू की उम्मीद रखे और इसी से काम चलाये जी.. काहे की यही सब तो इटली मे खाया जाता है ना...?

असली खबर यहा पढे

Sunday, December 23, 2007

इत्ती मेहनत और फ़िर पुरानी सरकार,कैसे हो रवीश बाबू...?

मेहनत तो की पर ऐसी मेहनत किस काम की...?


क्यो रवीश बाबू कैसी कही...:)


अब ऐसे मत छुपना..





कांगेस जीतेगी...भौ भौ..मोदी के गुजरात मे..भौ भौ..(कई साल गुजर गये दोस्त सुनते सुनते)

जीत गया मोदी का गुजरात


और यही रहा एम्पायर का फ़ैसला कोई शक/....?

चिठ्ठा इतिहास