Sunday, December 23, 2007

इत्ती मेहनत और फ़िर पुरानी सरकार,कैसे हो रवीश बाबू...?

मेहनत तो की पर ऐसी मेहनत किस काम की...?


क्यो रवीश बाबू कैसी कही...:)


अब ऐसे मत छुपना..





कांगेस जीतेगी...भौ भौ..मोदी के गुजरात मे..भौ भौ..(कई साल गुजर गये दोस्त सुनते सुनते)

जीत गया मोदी का गुजरात


और यही रहा एम्पायर का फ़ैसला कोई शक/....?

11 लोगों की राय:

Suresh Chiplunkar said...

कहाँ से लाते हो ऐसी तस्वीरें भाई, बढि़या खाका खींच कर रख दिया है... चार तस्वीरों में से दो में कुत्ते की आमद है (अर्थात पचास प्रतिशत) इसे क्या समझा जायेगा :) :) :)

ज्ञानदत्त पाण्डेय । GD Pandey said...

वाह! अरुण पहले से चित्र तैयार कर रखे थे क्या?

yunus said...

पंगेबाज जी लगता है शरारत करने की आपकी आदत नहीं जायेगी । आप शरारत करते रहिए हम मुस्‍कुराते रहने को तैयार हैं ।

संजय बेंगाणी said...

:)


आज पार्टी सार्टी चल रही है, कल टिप्पणी करेंगे :)

mamta said...

आपका स्टाइल बड़ा बढिया है। फोटो और कैप्शन दोनो ही मस्त है।

नीरज गोस्वामी said...

वाह..वाह...मजा आ गया.
नीरज

Sanjeet Tripathi said...

मान गए गुरु, बचपन से खुराफाती रहे होगे पक्का तभी अब तक आदत गई नही।
किस चक्की का आटा खाए थे प्रभो

सिरिल गुप्ता said...

एक बार फिर, जबरदस्त तस्वीरें

notepad said...

बहुत खूब !! ये चित्र विचित्र कहाँ से लाते हैं ? कैप्शन भी मज़ेदार !

राजीव जैन Rajeev Jain said...

बहुत बढिया

मजा आ गया साहब

तगडी तस्‍वीरें हैं

संजीव कुमार सिन्हा said...

धांसू। गजब। कमाल की सोच है आपकी। पता नहीं कहां है रवीश बाबू। शायद विश्‍लेषण करने में जुटे होंगे।

चिठ्ठा इतिहास