Friday, December 21, 2007

"उंगली हम भी दिखायेंगे, कोई शक"

यू तो उंगली दिखाने का इतिहास पुराना है,और कई जग जाहिर पंगे भी हो चुके है इस चक्कर मे ,पर साहब ये हमारी उंगली है और अंदाज भी हमारा,मर्जी भी हमारी ..ना ना आप कोई पंगा लेने की मत सोचना ....:)हा शरारत पसंद आये तो पसंद है बताने से मत चूकना..










10 लोगों की राय:

सिरिल said...

वाह जी वाह, यहां तो उंगलियों की भी पर्सनेलेटि है.

mamta said...

बहुत खूब :)

Jitendra Chaudhary said...

सही है। अच्छा लगा।
बकिया सब तो ठीक है, लेकिन ये बताओ कि आजकल गायब किधर हो?

ज्ञानदत्त पाण्डेय । GD Pandey said...

चलो, जीतेन्द्र के सवाल का जवाब दो। वैसे जीतेन्द्र भी अपने सवाल का जवाब दें - ज्यादा दिखते नहीं!

अविनाश वाचस्पति said...

ऊंगली तक के कारनामे तो ठीक
पर ये ऊंगुलिनी का क्या किस्सा
ऊंगली तुम्हारी और ऊंगुलिनी ?

बाल किशन said...

वाह! अच्छा है.
नई और अद्भुत कला है.
आपने बहुत खूबसूरती से पेश किया है.
क्या इन तस्वीरों का इस्तेमाल मैं कर सकता हूँ? आपकी आज्ञा से.

अरुण said...

सिरिल @ भाइ बिलकुल है जी उंगलिया की अपनी हस्ती..
जीतू @ हम तो यही है जी ,जीना यहा,मरना यहा इसके सिवा जाना कहा ,जी चाहे जब हम को आवाज दो हम है वही हम थे जहा..पर अपनी सुनाओ कहा कुये के अंदर उतरे हुये थे..
अविनाश जी @ भाइ अब जहा मे कौन अकेला रहा है...?
बालकिशन जी @ बिलकुल करेजी धड्ल्ले से करे हमे भी किसी दोस्त ने भेजी थी

Shiv Kumar Mishra said...

बढ़िया लगी उंगलियों के ये नुमाईस...लेकिन ज्यादातर उंगलियाँ टेढ़ी हैं......शायद पंगेबाजी का सवाल है......:-)

ALOK PURANIK said...

भई, सही उंगली की है।

महावीर said...

क्या बात है!!!
ना जाने क्यों आपकी उंगलियां देख कर ये
शे'र याद आगयाः

"मता-ए-लौह-ओ-क़लम छिन गई तो क्या ग़म है,
कि ख़ून-ए-दिल में डुबो ली हैं उंगलियां मैंने"

चिठ्ठा इतिहास