Tuesday, September 25, 2007

नारद और खुदा (धारावाहिक)


नारद जी जमाने से स्वर्ग नही गये थे. जब से उन्होने स्त्यमेव जयते को कठंस्थ कर जीवन मे उतार लिया था..वो समझ गये थे की सत्य नोट मे है हमेशा इसी की विजय होती है..इसी से सारी सृष्टी चलती है..इसी के दम पर उर्वशी,मेनका रंभा नृत्य करती है चाहे स्वर्ग हो या मृत्यू लोक..फ़िर खामखा कभी इस देवता की मक्खन बाजी कभी उस देवता की मक्खन बाजी..उस पर भी वोह मजाक उडाने से कभी नही चूकते..ऐसे माहोल मे दर दर भटकते देवताओ का कार्य करते करते कब उन्हे ज्ञान प्राप्त हुआ ..पुरानी बात हो चुकी थी.. अब उन्हे किसी देवता के दया भावना का मूंह नही तकना था..जो कार्य वह देवताओ के लिये करते थे जब से उन्होने सरकारी अधिकारियो, रूलिंग पार्टी के नेताओ के लिये करना शुरू किया यही मृत्यू लोक मे स्वर्ग मे दर्शन उन्हे होने लगे ..जिस माया मोह को त्याग कर वह लोगो कॊ स्वर्ग वासी बनने के लिये उकसाते थे..जिस स्वर्ग को देख देख कर वह ललचाते रहते थे..जिस स्वर्ग की कामना मे वह देवताओ की चापलूसी करने मे लगे रहते थे..वह उन्हे यही मृत्यू लोक मे माया के दम पर हासिल था ..उन्होने सत्य को तन मन धन से आत्म सात कर लिया था..एक वो वक्त था जब उन्हे एक सुंदरी के चक्कर मे देवताओ से बंदर का रूप मे हसी उडवानी पडी थी ..पर अब वह दिन भर बॄम्हांड सुंदरीयो मे घिरे रहते है..आज दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत उनके बच्चो की मा कहलाती है..नारद जी का फ़ार्म हाउस आज हजारो वर्ग मीटर मे फ़ैला हुआ बडे बडे पूंजी पतियो की जलन का कारण बना हुआ था

सारे परिवार को यही भारत मे सैट कर दिया था..सब सुखी थे हर पार्टी मे उनके परिवार के लोग थे.कोई भी पार्टी राज करे उनके जूनियर नारद वही सैट हो जाते थे..आखिर सबकॊ खबरे चाहिये थी..सबकॊ कही ना कही जुगाड फ़िट करा ही डालते थे..किसी भी बडी डील का नारद जी के बिना होना नामुमकिन बात थी..


नारद ने प्रगती की बयारो का मजा लेना सीख लिया था..वीणा को उतार कर कब कबाडी को बेचा नारद को खुद याद नही है.. नारद ने जब से डी की महत्ता पहचानी थी तब से उसकी शामे पांच सितारा होटल मे डांस ,ड्रिक और डील करते गुजरती थी

लेकिन गडबड हो गई शुहैब के साथ लटक कर खुदा भारत मे चले आये..यहा आकर उन्हे अचानक नारद की याद आ गई..शुहैब भी खुदा से खुदा खुदा कर तंग हो चुके थे..फ़ोरन खुदा से कुछ वक्त को पीछा छुडाने का अच्छा तरीका उन्हे यही लगा..खुदा को नारद का फ़ोन मेल सब दे डाला..नारद कॊ उम्मीद ही नही थी की प्रभु इतने दिनो बाद खुदा का रूप मे उन्हे यहा आकर पकड लेगे..

कल आगे..

चिठ्ठा इतिहास